सरस्वती पुनरुद्धार को नई रफ्तार : टौंस नदी से हरियाणा तक जल लाने की तैयारी

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चंडीगढ़, 09 अप्रैल । प्राचीन सरस्वती नदी के पुनरुद्धार को लेकर हरियाणा और उत्तराखंड सरकार ने संयुक्त रूप से एक्शन प्लान तैयार किया है। टौंस नदी के पानी को हरियाणा में लाने को लेकर दोनों राज्यों के बीच कार्ययोजना तैयार करने को लेकर सहमति बनी है। इसी सिलसिले में हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने हरिद्वार में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सलाहकार मन्नू गौड़ से मुलाकात की।

हरियाणा और उत्तराखंड सरकार ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने के साथ जल संकट समाधान को लेकर रणनीति तैयार की है। किरमिच ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री की ओर से उत्तराखंड सरकार को पत्र भेजकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया गया था, जिस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब दोनों राज्यों के समन्वय से टौंस नदी और अन्य जल स्रोतों को जोड़कर हरियाणा तक जल पहुंचाने की दिशा में कार्य तेज किया जा रहा है।

धुम्मन सिंह किरमिच ने कहा कि टौंस नदी, जो गंगा के बाद बारहमासी जल प्रवाह वाली प्रमुख नदी मानी जाती है, को वैदिक सरस्वती का स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र महाभारत काल से जुड़ा है और स्थानीय लोग आज भी पांडवों की पूजा करते हैं। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार सरस्वती नदी का उद्गम उत्तराखंड के बंदरपूंछ ग्लेशियर से माना जाता है, जहां से गंगा और यमुना की तरह इसका प्रवाह रहा है। इसी आधार पर अब टौंस नदी और उसकी सहायक नदियों के जल को सरस्वती के स्वरूप में हरियाणा तक लाने की योजना पर काम किया जा रहा है।