बलरामपुर, 07 मार्च । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसी कड़ी में विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत रेहड़ा की निवासी सविता सिंह ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। आज वे ट्रैक्टर और थ्रेसर संचालन के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
सविता सिंह राजमोहनी महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार मुख्य रूप से कृषि कार्य और मजदूरी पर निर्भर था। सीमित आय के कारण परिवार की बढ़ती जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था और कई बार आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था।
बदलाव की शुरुआत तब हुई जब सविता सिंह ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नियमित बचत और सामूहिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। समूह के माध्यम से उन्हें सामुदायिक निवेश निधि के रूप में 50 हजार रुपये तथा बैंक क्रेडिट लिंकेज के तहत 1 लाख 20 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।
इस सहायता से सविता सिंह ने ट्रैक्टर और थ्रेसर संचालन का व्यवसाय शुरू किया और स्वयं इसे संचालित करने लगीं। अब वे खेतों में जुताई, बुवाई और फसल मड़ाई जैसे कार्य कर रही हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां परिवार सीमित संसाधनों में जीवनयापन करता था, वहीं अब उनकी वार्षिक आय लगभग दो लाख रुपये तक पहुंच गई है। इससे वे परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य की योजनाओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।
सविता सिंह बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला। वे अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।