नई दिल्ली, 11 फ़रवरी । उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को इस बात की जांच करने का निर्देश दिया कि क्या बेलाडांग में 16-17 जनवरी को हुई हिंसा की एनआईए से आगे जांच कराने की जरुरत है। उच्चतम न्यायालय ने एनआईए को इस मामले की सीलबंद रिपोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय को सौंपने का निर्देश दिया।
उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि हर भावनात्मक गुस्सा आतंकवादी कृत्य नहीं होता है और इसे देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरे के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बेलाडांग हिंसा के दर्ज केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए)की ओर से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) की धाराएं लगाए जाने पर ये टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसा लगता है कि हिंसा एक प्रवासी मजदूर की मौत के जवाब में हुई थी। कोर्ट ने कहा कि एनआईए ने बिना केस डायरी देखे ही यूएपीए के प्रावधान लगा दिए।
दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने 28 जनवरी के कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्र सरकार को केंद्रीय बलों की तैनाती और एनआईए एक्ट लगाने पर विचार करने को कहा था।