फारबिसगंज में श्रीठाकुरजी का 138वां जन्मोत्सव धूमधाम से संपन्न, गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा

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धर्मसभा को संबोधित करते हुए कटिहार से आए बालमुकुंद चौधरी उर्फ मिस्टर दा ने कहा कि जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए और जीवन जीने का सही पथ दिखाए वही सद्गुरु होते हैं। युग, काल और समय के अनुसार नर देह धारण कर सरल विधान देने वाले पुरुषोत्तम ही वर्तमान के मार्गदर्शक होते हैं और वर्तमान युग के पुरुषोत्तम श्रीश्रीठाकुर अनुकूलचंद्रजी हैं, जो हमें एक सच्चा और प्राकृतिक मनुष्य बनने की राह दिखाते हैं।

मधुबनी से आए प्रवीण कुमार दा ने डीपी वर्क प्रोजेक्ट के माध्यम से घर-घर जाकर ठाकुरजी के प्रेम संदेश को पहुंचाने और लोगों को धर्म के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्म ही धर्म है और सुकर्म से कोई भी मनुष्य अपना भाग्य बदल सकता है, यदि वह इष्ट से युक्त हो। उनके विचारों से अररिया, रानीगंज, पूर्णिया, हांसा, सहरसा, सुपौल सहित आसपास के क्षेत्रों एवं पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से आए हजारों भक्त भावविभोर हो उठे।

फारबिसगंज के अचीतानंद भगत एवं पूर्णिया के रोनी दा ने दैनिक जीवन में इष्ट और ठाकुरजी की महत्ता पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत सुबह उषा कीर्तन एवं सामूहिक प्रार्थना से हुई। विशाल हंसासन पर ठाकुरजी की प्रतिकृति के साथ शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें मधेपुरा से आए रिपु रोशन, भवानीपुर के ललित गुप्ता व विजय भगत सहित कलाकारों ने भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय बना दिया।