देहरादून, 13 मई । लोक सेवा प्रसारक आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज दून पुस्तकालय सभागार में आयोजित शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय संगीत संध्या में संगीत, संस्कृति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि भारतीय मानक ब्यूरो, देहरादून के निदेशक हेमंत बी.आड़े ने कहा कि आकाशवाणी पिछले नौ दशकों से ‘भारत की आवाज’ के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक आकाशवाणी की भूमिका अतुलनीय रही है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी ने भारतीय संगीत विरासत को संरक्षित और समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुसार संगीत कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं,बल्कि आत्मा की भाषा हैं, जो मन को शांति और जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
विशिष्ट अतिथि उपनिदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय आर.के.बनवारी ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन समाज को संगीत और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उद्घोषिका कल्पना पंकज ने किया।
आकाशवाणी देहरादून के सहायक निदेशक कार्यक्रम संगीत रमेश चंद्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगीत जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करता है।
इस अवसर पर उपनिदेशक (अभियंत्रण) दूरदर्शन उत्तरयाखंड कुलभूषण कुमार ने कहा कि आकाशवाणी के 90 वर्षों का यह उत्सव भारतीय संस्कृति, कला और संगीत परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताया।
कार्यक्रम में मंजुला नेगी, संकल्प मिश्रा, रोबिन करमाकर, नवीन जोशी, पवन गोयल, सुनील कुमार, अनिल दत्त शर्मा और अनिल कुमार भारती सहित आकाशवाणी, दूरदर्शन और क्षेत्रीय समाचार इकाई से जुड़े अनेक उद्घोषक, समाचार वाचक, प्रसारण सहायक, युवा, संगीत प्रेमी एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे।