देहरादून, 30 सितंबर । उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग में आरक्षित वर्गों की सीटों के आवंटन को लेकर सामने आई शिकायतों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि अपात्र अभ्यर्थियों को आरक्षित सीटों का लाभ दिए जाने की पुष्टि होती है तो वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होंगे।
यशपाल आर्य ने बुधवार को यहां जारी बयान में कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय (एचएनबीयूएमयू) की ओर से संचालित काउंसलिंग के प्रथम चरण की सूची में कुछ अभ्यर्थियों की श्रेणी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार क्रम संख्या 684 पर दिपांशु और 745 पर कुसुम मल को अनुसूचित जाति श्रेणी में सीट आवंटित की गई है,जबकि शिकायतकर्ता ने दोनों को सामान्य श्रेणी का बताया है। इसी तरह क्रम संख्या 820 पर प्रियांशु गुप्ता और 825 पर हर्षित को अनुसूचित जाति श्रेणी की सीट आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। दोनों अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित हैं। क्रम संख्या 951 पर चित्रा को सामान्य-ईडब्ल्यूएस श्रेणी का बताते हुए अनुसूचित जाति श्रेणी की सीट आवंटित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इन पांच मामलों समेत ऐसे सभी मामलों की जांच होनी चाहिए। किसी अभ्यर्थी की वास्तविक श्रेणी और आरक्षण की पात्रता का अंतिम निर्धारण मूल जाति प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों के सक्षम प्राधिकारी से सत्यापन के बाद ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की प्रवेश और फ्लोट स्थिति की अस्थायी सूची जारी हुई है। ऐसे में श्रेणी और स्थायी निवास से जुड़े प्रमाणपत्रों का सत्यापन जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुजरात, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार अथवा अन्य राज्यों से आए अभ्यर्थियों को केवल दूसरे राज्य का होने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। हालांकि, उत्तराखंड के आरक्षण या स्थायी निवास का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की वैधानिकता और पात्रता की जांच आवश्यक है।
यशपाल आर्य ने मांग की कि पहले और दूसरे चरण में आरक्षित श्रेणी या स्थायी निवास के आधार पर सीट प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का भौतिक और डिजिटल सत्यापन कराया जाए। संदिग्ध जाति एवं स्थायी निवास प्रमाणपत्रों का संबंधित जिलाधिकारी या सक्षम प्राधिकारी से सत्यापन कराया जाए।
उन्होंने कहा कि गलत प्रमाणपत्र पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी का प्रवेश नियमानुसार निरस्त किया जाए और कानून के तहत कार्रवाई हो। साथ ही एचएनबीयूएमयू तथा काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। जानबूझकर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
आर्य ने शिकायतों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने, जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने तथा प्रमाणपत्र सत्यापन पूरा होने से पहले अगली काउंसलिंग के संबंध में सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आरक्षण के प्रावधानों का पालन होना चाहिए।