प्रयागराज, 24 जनवरी । उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त प्रोफेसर हिमांशु शेखर झा ने कहा कि दिव्यांगजन ही नहीं समाज के प्रत्येक कमजोर व्यक्ति के लिए शिक्षा सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम है। झा शनिवार को प्रयागराज के जमुनीपुर में स्थित नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय परिसर में दिव्यांगजन का समग्र सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
हिमांशु शेखर झा ने दिव्यांगता के प्रकार, उनके समावेशन के अधिकारों एवं सरकार द्वारा प्राप्त लाभों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा को सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए शिक्षा एक सशक्त माध्यम बन सकती है। जब शिक्षा के माध्यम से अच्छे एवं खराब का अन्तर का ज्ञान आ जाएगा तो विकास का रास्ता अपने आप मिल जाएगा।
कार्यशाला के समापन सत्र की विशिष्ट अतिथि जगतगुरू रामभद्राचार्या विश्वविद्यालय की डॉ. निहार रंजन मिश्रा ने दिव्यांगता की समझ, प्रकार, कारण एवं शीघ्र पहचान पर सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को विधिक जागरूकता से सशक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगता के विविध प्रकारों, उनके कारणों, शीघ्र पहचान, निदान तथा चिकित्सीय पुनर्वास के प्रति समाज में जागरूकता उत्पन्न करना है। साथ ही सहायक उपकरणों, कृत्रिम अंगों, आधुनिक पुनर्वास तकनीकों, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, मनोसामाजिक देखभाल, समावेशी शिक्षा तथा सहायक आईसीटी उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दिव्यांगजनों के लिए शीघ्र हस्तक्षेप एवं प्रभावी पुनर्वास की आवश्यकता पर बल दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन कुलपति प्राे. राेहित रमेश ने दिया। प्रतिकुलपति डॉ. एस.सी. तिवारी ने भी सम्बाेधित किया। विश्वविद्यालय के विधि संकाय के संकायाध्यक्ष, डॉ. स्वप्निल त्रिपाठी ने दिव्यांगजन के अधिकार और सभी प्रकार के माध्यमों पर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. वंदना मिश्रा, सहायक आचार्य, विशेष शिक्षा संकाय, अंजली सिंह, सहायक आचार्य, विशेष शिक्षा संकाय, राकेश कुमार, सहायक आचार्य, विशेष शिक्षा संकाय, शिल्पी देवी, सहायक आचार्य, विशेष शिक्षा संकाय,नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय ने प्रारंभिक हस्तक्षेप, निदान, जनगणना के आंकड़ों, समावेशी शिक्षा एवं चिकित्सीय पुनर्वास के महत्व को विस्तार से रेखांकित किया।