जयपुर, 29 अप्रैल । वैशाख कृष्ण चतुर्दशी, गुरुवार को भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। भगवान विष्णु ने अपने उग्र रूप में नृसिंह अवतार लेकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी और हिरण्यकश्यपु का वध किया था। चौड़ा रास्ता, चांदपोल बाजार के नींदड़ रावजी का रास्ता, पुरानी बस्ती, सेठी कॉलोनी सहित अन्य स्थानों पर स्थित भगवान नृसिंह के मंदिरों में सुबह पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी। जन्मोत्सव की बधाइयों के बीच उछाल होगी। चौड़ा रास्ता स्थित ताडक़ेश्वर मंदिर के बाहर शाम को नृसिंह लीला का सजीव मंचन होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार नृसिंह अवतार आधा मानव और आधा सिंह के रूप में प्रकट हुआ था, जिसने यह संदेश दिया कि जब-जब धरती पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हैं। ग्रंथों में लिखा है कि भगवान नृसिंह की पूजा करने से व्यक्ति को भय, रोग, शत्रु और तनाव से मुक्ति मिलती है।
नृसिंह जयंती पर व्रत-पूजा करने के साथ-साथ दान करने का भी विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन श्रद्धा के अनुसार अनाज, जल, तिल, कपड़े, धन, छाता दान करना चाहिए। अभी गर्मी का समय है, तो किसी मंदिर में भक्तों के लिए पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था कर सकते हैं। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन से दुख दूर होते हैं।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। कई श्रद्धालु तीर्थ स्नान करते हैं, लेकिन यह संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके बाद घर में गंगाजल या गौमूत्र का छिडक़ाव करना चाहिए। भगवान की पूजा में पहले व्रत और दान करने का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर संयम, शांति और भक्ति भाव से मंत्र जप करना चाहिए। नृसिंह जयंती की मुख्य पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है। मान्यता है कि इसी समय भगवान नृसिंह का प्रकट स्वरूप अधिक प्रभावशाली माना जाता है। नृसिंह जयंती के अगले दिन शुक्रवार को वराह जयंती मनाई जाएगी।