नई दिल्ली, 07 मई । दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजस्थान के मेवाड़ के शाही परिवार की विरासत के विवाद मामले में अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत के परीक्षण की अनुमति दे दी है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने पक्षकारों के वकीलों, फॉरेंसिक और हैंडराइटिंग विशेषज्ञों को वसीयत की मूल प्रति का परीक्षण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 15 मई को वसीयत का परीक्षण करने और 19 मई को इस मामले की अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने वसीयत के परीक्षण में शामिल विशेषज्ञों को निर्देश दिया कि वो परीक्षण करने के दौरान मूल वसीयत की फोटो नहीं खींचे। उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की याचिका पर पद्मजा परमार और उनकी बहन भार्गवी कुमारी मेवाड़ को नोटिस जारी किया था।
उच्चतम न्यायालय ने 18 दिसंबर, 2025 को मेवाड़ के शाही परिवार के सदस्यों की सभी याचिकाओं को दिल्ली उच्च न्यायालय ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। पहले परिवार के कुछ सदस्य़ों की याचिकाएं बांबे उच्च न्यायालय में और कुछ सदस्यों की याचिकाएं राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर बेंच में दाखिल की गई थीं। उच्चतम न्यायालय ने सभी याचिकाएं एक ही जगह सुनी जाएं इसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
विवाद उदयपुर स्थित सिटी पैलेस, एचआरएच होटल्स ग्रुप सहित अन्य संपत्तियों पर नियंत्रण का है। याचिकाओं में महाराजा अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत की वैधता को चुनौती दी गई है। एक याचिकाकर्ता उदयपुर के पूर्व महाराजा अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार से हैं। याचिकाकर्ता महाराणा भगवंत सिंह मेवाड़ के उत्तराधिकारी थे।
उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने दायर की थी। लक्ष्मण सिंह मेवाड़ की ओर से बांबे उच्च न्यायालय में लंबित मामलों को राजस्थान उच्च न्यायालय में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी, जबकि दूसरी याचिकाकर्ता पद्मजा कुमारी परमार ने राजस्थान उच्च न्यायालय के जोधपुर बेंच में लंबित मामलों को बांबे उच्च न्यायालय ट्रांसफर करने की मांग की थी।