लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक नवजात की बुआ ज्ञानो ने कहा कि यदि समय पर
इलाज और वेंटिलेटर मिल जाता तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। परिवार का रो-रोकर
बुरा हाल है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में नागरिक अस्पताल की पीएमओ रीना जैन ने बताया कि
एनआईसीयू में केवल एक ही वेंटिलेटर है। उस पर पहले से एक बच्चा भर्ती था। अग्रोहा मेडिकल
कॉलेज में भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था, इसलिए नवजात को बेहतर उपचार की उम्मीद में
रोहतक रेफर किया गया था।