पवित्र चूड़धार मंदिर परिसर में रील और वीडियो बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध, आदेश जारी

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नाहन, 04 जुलाई । उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल और हिमाचल प्रदेश की सर्वोच्च चोटियों में शुमार शिरगुल महाराज मंदिर चूड़धार में अब श्रद्धालु या पर्यटक रील्स और वीडियो नहीं बना पाएंगे। सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज की होड़ में मंदिर की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता को पहुंच रहे नुकसान को देखते हुए प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। एसडीएम चौपाल एवं मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने मंदिर परिसर और गर्भगृह के भीतर वीडियोग्राफी, रील्स और तमाम सोशल मीडिया गतिविधियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के आधिकारिक और लिखित आदेश जारी कर दिए हैं।

प्रशासन के ध्यान में यह बात लाई गई थी कि कुछ लोग मंदिर परिसर और सबसे पवित्र माने जाने वाले गर्भगृह के अंदर भी मोबाइल से रील्स और वीडियो बनाकर मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं। इस पर सख्त संज्ञान लेते हुए एसडीएम चौपाल ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध मंदिर के पुजारियों, कर्मचारियों से लेकर आम श्रद्धालुओं और बाहर से आने वाले पर्यटकों सभी पर समान रूप से लागू होगा। आदेशों में साफ कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस पवित्र परिसर के अंदर वीडियोग्राफी करता हुआ या रील बनाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इसके साथ ही, मानसून की शुरुआत के बाद चूड़धार यात्रा के दौरान बढ़ने वाले हादसों और सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने गंभीर चिंता जताई है। चूड़धार के रास्ते में दुर्गम चढ़ाई और खतरनाक उतराई है, जहां बरसात के दिनों में घनी धुंध और भारी बारिश के कारण विजिबिलिटी बिल्कुल शून्य हो जाती है। खासकर जो सिंगल साइड ट्रैक (जैसे सिरमौर की तरफ से आने वाला ट्रैक) हैं, वहां घनी धुंध में श्रद्धालुओं के रास्ता भटकने और घने जंगलों में गुम होने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि बहुत ज्यादा मौसम खराब होने या तेज बारिश के दौरान ट्रैकिंग करने से बचें और मौसम साफ होने पर ही अपनी यात्रा को आगे बढ़ाएं।

सुरक्षा के साथ-साथ चूड़धार के संवेदनशील पर्यावरण को बचाने के लिए भी इस बार प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रहा है। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं द्वारा फेंके जाने वाले प्लास्टिक के पैकेट, खाली बोतलें और अन्य कूड़ा-कचरा हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। इस हुड़दंग और गंदगी को रोकने के लिए प्रशासन अब वन विभाग और वन्यजीव विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से साफ तौर पर कहा है कि वे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं और यदि कोई भी व्यक्ति रास्ते में कचरा फैलाता हुआ पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।