जयपुर, 22 जुलाई । राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर के दीवान जी का बाग क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट की भूमि पर जारी पट्टा रद्द करने की कार्यवाही को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट के रूप में चिन्हित भूमि के आवासीय उपयोग को वैध नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने भूमि के उपयोग में बदलाव करने वाले अफसरों पर विभागीय जांच कर तीन माह में पालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश विकास मोदी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि मास्टर प्लान केवल नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि वैधानिक प्रभाव वाला दस्तावेज है। जिसका पालन सभी सरकारी और स्थानीय निकायों के लिए अनिवार्य है। ग्रीन बेल्ट का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना और अनियंत्रित शहरी विस्तार रोकना है। ऐसे क्षेत्र में आवासीय या व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देना नियोजन कानूनों की मूल भावना के विपरीत है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संपत्ति का अधिकार केवल वैध रूप से अर्जित अधिकारों की रक्षा करता है। यदि कोई अधिकार कानून की अवहेलना से उत्पन्न हुआ है तो उसे संवैधानिक संरक्षण नहीं मिल सकता।
याचिकाकर्ता ने अलवर नगर निगम की ओर से पट्टा निरस्त करने एवं स्वायत्त शासन विभाग के भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90-ए के तहत की गई कार्यवाही को शून्य घोषित करने के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्होंने सभी राजस्व अभिलेखों, धारा 90-ए की कार्यवाही और नगर निगम की ओर से जारी पट्टे के आधार पर भूमि खरीदी, इसलिए वे बोनाफाइड खरीदार हैं। राज्य सरकार और नगर निगम अलवर की ओर से अधिवक्ता अजय शुक्ला ने कहा कि संबंधित भूमि मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट के रूप में दर्ज है। ऐेसे में भूमि का आवासीय उपयोग या नियमन कानून के विपरीत है। नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 73-बी के तहत यदि कोई पट्टा कानून के विरुद्ध या गलत तथ्यों के आधार पर जारी हुआ हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।