850 की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
मामले की जांच कर रहे एएसआई राजा राम ने बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और
मोबाइल नंबरों के तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि ठगी
की राशि इक्विटास बैंक समेत अन्य खातों में ट्रांसफर हुई थी। तकनीकी सुराग मिलते ही
पुलिस टीम ने राजस्थान के बूंदी व कोटा में दबिश दी और तीन आरोपियों राजस्थान के बूंदी
जिला निवासी उमाशंकर सैनी, सेवक सिंह व विकास मीणा को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी उमाशंकर ने पैसों के लालच में
अपना बैंक खाता सह-आरोपी सेवक सिंह को दिया था, जिसने इसे आगे विकास मीणा को साइबर
अपराध के लिए उपलब्ध कराया। इसके अलावा, आरोपी दूसरों के नाम से जारी फर्जी सिम कार्ड
का इस्तेमाल कर रहे थे। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को हिसार लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें
न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बरामद मोबाइल फोन व सिम कार्ड्स को फोरेंसिक जांच
के लिए भेजा गया है ताकि इस साइबर नेटवर्क के पूरे सिंडिकेट और अन्य संलिप्त आरोपियों
का पर्दाफाश किया जा सके।