बीमा दावा लटकाने पर बीमा कंपनी को झटका, उपभोक्ता आयोग ने विधवा के पक्ष में सुनाया फैसला

Spread the love

पश्चिमी सिंहभूम, 04 अगस्त ।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावा का समय पर निपटारा नहीं करने को सेवा में गंभीर कमी मानते हुए यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मृतक किसान की पत्नी के पक्ष में 6.50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश मंगलवार को दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर बीमा राशि, मुआवजा और वाद व्यय का भुगतान करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर 09 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह मामला चक्रधरपुर प्रखंड के कोलचक्रा गांव निवासी दिवंगत रेंगो गगराई की पत्नी मादुई गगराई की ओर से दायर उपभोक्तावाद से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार रेंगो गगराई ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक की चाईबासा शाखा से ऋण लिया था। ऋण के साथ यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की लोन सिक्योर इंश्योरेंस पॉलिसी भी ली गई थी। 14 मार्च 2023 को कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर से उनकी मौत हो गई।

पति की मौत के बाद मादुई गगराई ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन लंबे समय तक कंपनी की ओर से न तो दावा स्वीकृत किया गया और न ही अस्वीकृत। इस बीच बैंक की ओर से ऋण चुकाने का दबाव बनाए जाने पर शिकायतकर्ता को कर्ज लेकर दो लाख रुपये जमा करने पड़े। इसके बावजूद बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान लंबित रहा। हालांकि आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि दो वर्षों से अधिक समय तक दावा लंबित रखने के बावजूद कंपनी कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी का रवैया उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है और यह सेवा में स्पष्ट कमी की श्रेणी में आता है।

आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और महिला सदस्य देवश्री चौधरी की पीठ ने शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये की बीमा राशि, एक लाख रुपये मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा एवं दोनों विपक्षी पक्षों की ओर से संयुक्त रूप से 50 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा दावा के अनावश्यक विलंब के कारण शिकायतकर्ता को आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी, इसलिए उसे उचित क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए।