सतना, 12 अगस्त । सावन की हरियाली अमावस्या पर मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थल चित्रकूट में बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदाकिनी नदी के घाटों, भगवान मत्यगजेंद्रनाथ शिव मंदिर, कामतानाथ मंदिर और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान कर भगवान मत्यगजेंद्रनाथ का जलाभिषेक किया और भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद कामदगिरि की पंचकोसीय परिक्रमा की। पूरे चित्रकूट में ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय कामतानाथ’ के जयकारे गूंजते रहे।
हरियाली अमावस्या के पर्व को लेकर तड़के से ही मंदाकिनी के घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। स्नान के बाद श्रद्धालु भगवान मत्यगजेंद्रनाथ शिव मंदिर पहुंचे और जलाभिषेक किया। इसके बाद कामतानाथ प्रमुख द्वार मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। कामदगिरि का पूरा परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं से भरा रहा।
अच्छी बारिश और फसल के लिए किसानों ने की प्रार्थना
हरियाली अमावस्या पर चित्रकूट पहुंचे श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या किसानों की भी रही। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बुंदेलखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भगवान कामतानाथ से अच्छी बारिश और बेहतर फसल की कामना की। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना की। बड़ी संख्या में साधु-संत भी कामदगिरि की पंचकोसीय परिक्रमा में शामिल हुए।
सुरक्षा के लिए 500 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी तैनात
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश प्रशासन ने सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह के निर्देश पर मेला क्षेत्र में करीब 500 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। आईजी गौरव राजपूत की ओर से 50 नवआरक्षक और 130 आईजी रिजर्व बल उपलब्ध कराया गया। पुलिस मुख्यालय से एसएफ की नौवीं बटालियन की एक कंपनी भी चित्रकूट भेजी गई।
जिला पुलिस के करीब 250 जवान मेला क्षेत्र में तैनात रहे। प्रमुख मंदिरों, भीड़भाड़ वाले स्थानों और परिक्रमा मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया। मंदाकिनी घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ की टीम मौजूद रही।
मंदाकिनी में स्नान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसडीआरएफ के प्रशिक्षित जवान मोटरबोट और जीवनरक्षक उपकरणों के साथ घाटों पर तैनात रहे। वाहनों के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई। मेला व्यवस्था में विद्युत, वन विभाग, स्वास्थ्य, नगर परिषद और होमगार्ड के कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई।
कामदगिरि पर्वत पर अव्यवस्था, टूटी जालियों से श्रद्धालु पहुंचे ऊपर
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कामदगिरि पर्वत पर अव्यवस्था और गंदगी की स्थिति भी सामने आई। प्राचीन मुखारबिंद के आसपास कुछ श्रद्धालु पर्वत पर बैठकर भोजन करते दिखाई दिए। कई स्थानों पर गुटखा-पान की गंदगी और खुले में मूत्र त्याग किए जाने की शिकायतें भी सामने आईं। इससे पर्वत की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सवाल उठे।
बताया गया कि वन विभाग की कुछ जालियां क्षतिग्रस्त होने के कारण श्रद्धालु पर्वत के प्रतिबंधित हिस्से में पहुंच गए थे। सूचना मिलने के बाद चित्रकूट तहसीलदार कमलेश सिंह भदौरिया मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद श्रद्धालुओं को समझाइश देकर नीचे आने के लिए कहा। इसके बाद वन विभाग ने क्षतिग्रस्त जालियों को दुरुस्त कराया।
तहसीलदार कमलेश सिंह ने बताया कि कामदगिरि पर्वत पर वन विभाग की कुछ जालियां टूटी हुई थीं, जिसके कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऊपर जाकर भोजन कर रहे थे। सूचना मिलते ही श्रद्धालुओं को वहां से हटाया गया और वन विभाग ने जालियां ठीक करा दी हैं।
हरियाली अमावस्या पर चित्रकूट की धर्मनगरी दिनभर भक्ति में डूबी रही। मंदिरों की घंटियों, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच कामदगिरि की पंचकोसीय परिक्रमा करते भक्त आकर्षण का केंद्र बने रहे। मान्यता है कि सावन अमावस्या पर भगवान कामतानाथ के दर्शन और कामदगिरि की परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचे।