विकास कार्यों की सूचना दबाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त

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जोधपुर, 26 अगस्त । ग्राम पंचायत केतू कलां, तहसील शेखला में पंचायती राज अधिनियम के तहत विकास कार्यों, बजट और निर्माण संबंधी जानकारी दबाने के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता के आवेदन का नियमानुसार अगले 6 सप्ताह में निस्तारण करें।

केतू कलां निवासी श्रवण सिंह पुत्र डूंगर सिंह ने पंचायती राज अधिनियम के तहत गांव में कराए गए विकास कार्यों और आवंटित सरकारी बजट का ब्योरा मांगा था। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी (और सरपंच ने न केवल पारदर्शी तरीके से सूचना देने से इंकार किया, बल्कि डाक से भेजे गए आधिकारिक ज्ञापनों को लेने से भी साफ मना कर दिया। इसके बाद पीडि़त ने विकास अधिकारी सहित उच्चाधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामवासियों का आरोप है कि गांव के विकास के नाम पर सरकारी बजट का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। हाल ही में संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद इन आरोपों को और बल मिला है।

प्रशासनिक उपेक्षा से परेशान होकर ग्रामीणों ने राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली। मामले की सुनवाई न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुनील बिश्नोई और हनुमान सियाल ने पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकारी अपने संवैधानिक और कानूनी दायित्वों का उल्लंघन कर रहे हैं। कोर्ट ने पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तय समय सीमा में पारदर्शी निस्तारण का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।