सुदिव्य कुमार सोनू के द्वादश श्राद्धकर्म में पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी श्रद्धांजलि

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गिरिडीह, 17 सितंबर । झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू के द्वादश श्राद्धकर्म का आयोजन गुरुवार को गिरिडीह स्थित निवास उत्सव उपवन में किया गया।

श्राद्धकर्म में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह, राज्यसभा सांसद महुआ माजी समेत कई मंत्री, सांसद, विधायक, पक्ष-विपक्ष के नेता, कार्यकर्ता और अधिकारी पहुंचे तथा दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।

आयोजकों के अनुसार, करीब 25 से 30 हजार से अधिक लोगों ने कार्यक्रम में पहुंचकर सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि अर्पित की और श्राद्धकर्म का प्रसाद ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने दिवंगत मंत्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री ने सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा और उनकी बेटी से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाते हुए हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।

इससे पहले विधायक कल्पना सोरेन भी गिरिडीह पहुंचीं और श्राद्धकर्म से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू के व्यक्तित्व और जनसेवा के कारण गिरिडीह के लोग उनके निधन का दुख सहन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिवंगत मंत्री की कमी काफी खल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ-साथ गिरिडीह के लोगों के लिए भी लगातार काम किया। उनके निधन से राज्य की राजनीति और गिरिडीह ने एक सच्चा जनसेवक खो दिया है, जिसकी भरपाई आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि झामुमो परिवार दिवंगत नेता का हमेशा ऋणी रहेगा।

हेमंत सोरेन ने कहा कि इलाके में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा हो जिसकी बात सुदिव्य कुमार सोनू ने न सुनी हो और उसकी समस्या का समाधान निकालने का प्रयास न किया हो। उन्होंने कहा कि दिवंगत मंत्री सार्वजनिक जीवन में पार्टी, परिवार और समाज के लिए ईमानदारी के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हुए आगे बढ़ते रहे।

मुख्यमंत्री ने अंत में दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि श्रीहरि उन्हें अपने चरणों में स्थान दें।———-