साहित्य, कला और संस्कृति की पावन नगरी काशी के होटल इंदु पैलेस लमही में आयोजित ‘काशी कुंभ 2026’ के भव्य मंच पर बिहार के सहरसा जिले के 18 वर्षीय युवा साहित्यकार अर्पित रंजन को ‘काशी गौरव सम्मान 2026’ के अंतर्गत ‘सर्वश्रेष्ठ युवा साहित्यकार पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
यह राष्ट्रीय समागम मातृभाषा हिंदी संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।समारोह के द्वितीय सत्र काशी गौरव सम्मान समारोह के दौरान मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अश्वनी कुमार चौबे और काशी विश्वनाथ गद्दी के मुख्य अर्चक आचार्य श्रीकांत मिश्रा ने संयुक्त रूप से अर्पित रंजन को यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा।
इस गौरवमयी क्षण के दौरान भारत सरकार के पूर्व भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। देश की बड़ी राजनैतिक व आध्यात्मिक विभूतियों ने थपथपाई पीठपुरस्कार प्रदान करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार चौबे ने कहा कि इतनी कम उम्र में देश और समाज को सही दिशा दिखाने वाली रचनाएं लिखना सचमुच अद्भुत है। वहीं काशी विश्वनाथ गद्दी के मुख्य अर्चक आचार्य श्रीकांत मिश्रा ने अर्पित को आशीर्वाद देते हुए उनकी लेखनी की सराहना की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कवीन्द्र नारायण श्रीवास्तव, अमरीश सिंह भोला, डॉ. राजीव श्री गुरु जी और श्री चक्रपाणि ज्ञानपुरी जी समेत कई शीर्ष राजनेता, वरिष्ठ साहित्यकार और विद्वान उपस्थित थे।
वर्तमान में सहरसा के शिवपुरी निवासी 12वीं कक्षा के छात्र अर्पित रंजन ने बेहद कम उम्र में अपनी विशिष्ट कला और लेखन प्रतिभा से हिंदी साहित्य जगत में एक खास पहचान बनाई है। वे अपनी बहुचर्चित पुस्तकों ‘अर्पण’ और ‘आकांक्षी’ के लेखक हैं। उनकी ये रचनाएं आज के युवाओं के संघर्ष, उनके बड़े सपनों, जीवन-मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को बेहद प्रेरणादायक रूप में समाज के सामने प्रस्तुत करती हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनकी इसी अद्भुत रचनात्मकता, विलक्षण प्रतिभा और उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए आयोजन समिति के मातृभाषा हिंदी संगठन ने उन्हें इस राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना।”
साहित्य से समाज, समाज से राष्ट्र” का संदेशपोस्टर पर अंकित मुख्य ध्येय वाक्य “साहित्य से समाज, समाज से राष्ट्र” को चरितार्थ करते हुए अर्पित रंजन की इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय उपलब्धि से उनके गृह जिले सहरसा समेत पूरे बिहार और हिंदी साहित्य जगत में हर्ष और गौरव का माहौल है।