कोटा, 11 अक्टूबर । शारदीय नवरात्र के पावन पर्व के साथ ही रविवार को कोटा के ऐतिहासिक 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का भव्य आगाज हो गया। मेले के शुभारंभ पर रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा, वहीं ‘मेला दशहरा’ लिखी पट्टियों वाले गुब्बारे हवा में छोड़े गए। धार्मिक आस्था, परंपरा और उत्सव के उल्लास के बीच आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने झंडारोहण कर मेले के शुभारंभ की घोषणा की। इसके साथ ही कोटा के प्रसिद्ध दशहरा मेले की रौनक शुरू हो गई।
मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में मंत्री मदन दिलावर, हीरालाल नागर, विधायक कल्पना देवी और अधिकारियों ने सहभागिता निभाई। आयोजन के दौरान आतिशबाजी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आसमान में छोड़े गए गुब्बारों ने भी कार्यक्रम को आकर्षक स्वरूप दिया। नवरात्र स्थापना के अवसर पर शुरू हुए इस आयोजन के साथ शहर में उत्सवी माहौल बनने लगा है।
राष्ट्रीय दशहरा मेले के औपचारिक उद्घाटन से पहले प्रथम नवरात्र पर आशापुरा माता मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान विधायक संदीप शर्मा, महापौर अनुसुईया गोस्वामी और उपमहापौर विवेक राजवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा नगर निगम के कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और मेले के सफल आयोजन की कामना की। इसके साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई।
विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि सनातन संस्कृति में शुभ और बड़े कार्यों की शुरुआत नवरात्र जैसे पावन पर्व पर करने की परंपरा रही है। दशहरा मेले की तैयारियां काफी समय से चल रही थीं और प्रथम नवरात्र के अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ मेले का शुभारंभ किया गया है।
विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि कोटा का दशहरा मेला अपनी भव्यता और विशिष्ट पहचान के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। मेले की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए नगर निगम प्रशासन, महापौर, उपमहापौर, आयुक्त और पार्षद लगातार प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेले में आने वाले आमजन और दूर-दराज से पहुंचने वाले व्यापारियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मेले में आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
नवरात्र के पहले दिन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शुरू हुआ 133वां राष्ट्रीय कोटा दशहरा मेला शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। झंडारोहण, आतिशबाजी और गुब्बारे छोड़ने के कार्यक्रम ने शुभारंभ को आकर्षक बनाया। वहीं आशापुरा माता मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ मेले की शुरुआत ने आयोजन को धार्मिक स्वरूप प्रदान किया।
कोटा दशहरा मेला अपनी ऐतिहासिक परंपरा, भव्य आयोजनों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। मेले के आगाज के साथ ही शहरवासियों और बाहर से आने वाले लोगों के बीच उत्साह का माहौल बन गया है।