पैरा एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे दो बोकिया खिलाड़ी, खेल मंत्रालय की मंजूरी

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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर । भारतीय बोकिया खिलाड़ी सचिन चमारिया 18 अक्टूबर से शुरू होने वाले आइची-नागोया पैरा एशियाई खेल-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। खेल मंत्रालय ने भारतीय दल में बोकिया के दो खिलाड़ियों को शामिल करने की मंजूरी दी है। सचिन बीसी-3 वर्ग की व्यक्तिगत और युगल स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे।

वर्ष 2008 में रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण सचिन के चारों अंगों में लकवा हो गया था। इस घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। वर्ष 2021 में उन्होंने बोकिया खेल से जुड़कर प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी की और एक नया लक्ष्य निर्धारित किया। इसके बाद वह लगातार छह बार राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वह दिव्यांगजनों के समावेशन और खेलों के माध्यम से उनके लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

सचिन ने कहा, “मैं पैरा एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर देने के लिए खेल मंत्रालय और उन सभी लोगों का आभारी हूं, जिन्होंने इसे संभव बनाया। भारतीय जर्सी पहनना मेरे लिए एक ऐसी जिम्मेदारी है, जिसे मैं बहुत महत्व देता हूं। मैं दोनों स्पर्धाओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा। मुझे उम्मीद है कि इस अवसर से बोकिया खेल को अधिक पहचान मिलेगी और दिव्यांगजन भी खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।”

सचिन ने 2026 में काहिरा में आयोजित विश्व बोकिया चैलेंजर प्रतियोगिता में सरिता द्विवेदी के साथ बीसी-3 युगल स्पर्धा में रजत पदक जीता था। उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक भी हासिल किया था।

उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में 2024 में बहरीन में आयोजित विश्व बोकिया चैलेंजर प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक भी शामिल है। इस उपलब्धि के साथ वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष बीसी-3 खिलाड़ी बने थे। उन्होंने 2024 में काहिरा चैलेंजर प्रतियोगिता की व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत और युगल स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता था।

विश्व रैंकिंग में 19वें स्थान पर काबिज सचिन भारतीय बोकिया खिलाड़ियों में सर्वोच्च रैंकिंग वाले खिलाड़ी हैं। उन्हें 2023 में भारतीय पैरालंपिक समिति के प्रेरणादायी खिलाड़ी पुरस्कार और 2024 में इंडियन अचीवर्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। खेल और दिव्यांगजन समावेशन के क्षेत्र में अपने प्रयासों के माध्यम से वह दिव्यांगता के प्रति समाज की सोच बदलने तथा समान अवसरों की आवश्यकता को सामने लाना चाहते हैं।

बोकिया एक सटीक निशाने वाला खेल है, जिसमें खिलाड़ियों को लाल या नीली गेंदों को सफेद लक्ष्य गेंद के जितना संभव हो सके करीब पहुंचाना होता है। इस सफेद गेंद को जैक कहा जाता है।

बीसी-3 वर्ग में गंभीर शारीरिक और गतिशीलता संबंधी कठिनाइयों वाले खिलाड़ी सहायक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इसमें गेंद को लक्ष्य की ओर पहुंचाने के लिए रैंप का उपयोग किया जाता है और एक सहायक रैंप संचालक के रूप में मदद करता है। हालांकि, हर गेंद की दिशा, रणनीति और स्थान तय करने का निर्णय खिलाड़ी स्वयं करता है।

बोकिया में गति या शारीरिक ताकत के बजाय एकाग्रता, धैर्य, रणनीतिक सोच और सटीकता महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण इसकी तुलना शतरंज से भी की जाती है, क्योंकि हर चाल आगे की रणनीति को प्रभावित करती है।