भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भांग-ड्रायफ्रूट और आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार

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उज्जैन, 17 सितंबर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया गया।

भस्म आरती की शुरुआत में प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच पूजन के बाद कपूर आरती हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

रजत मुकुट और मुण्डमाला से अलंकरण

भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का विशेष राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर रजत चंद्र, त्रिपुंड और रजत मुकुट सुशोभित किया गया। भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट, आभूषण और सुगंधित पुष्पों से भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया। श्रृंगार में शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित की गईं। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। आरती के दौरान श्रद्धालु लगातार बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामना कहकर आशीर्वाद मांगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी परंपरा के तहत भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।