शिमला, 01 मई । राजधानी शिमला के पंथाघाटी स्थित तिब्बती मठ में शुक्रवार को 2570वीं वैसाख बुद्ध पूर्णिमा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस मौके पर सुबह से ही मठ में विशेष पूजा-अर्चना, प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
मठ के लामा डुलो लोपन ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। उनके अनुसार, यही वह दिन है जब भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। इस कारण इसे ‘त्रिसम योग दिवस’ भी कहा जाता है और यह दिन बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
इस अवसर पर मठ में पारंपरिक तरीके से पूजा की गई और शांति, करुणा तथा अहिंसा के संदेश को दोहराया गया। लामा डुलो लोपन ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में शांति और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई। खास तौर पर दुनिया के कई हिस्सों, विशेषकर मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष और युद्ध को देखते हुए शांति की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने भी सामूहिक रूप से प्रार्थना कर मानवता के कल्याण और वैश्विक शांति की कामना की।
पूरे कार्यक्रम के दौरान मठ का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से भरा रहा, जहां लोगों ने शांति और सकारात्मकता का संदेश साझा किया।