हाईकोर्ट ने दोहराया संदेहास्पद लेन-देन के बजाए पूरा खाता नहीं करें फ्रीज, विस्तृत निर्देश भी जारी

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जयपुर, 27 अगस्त । राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर दोहराया है कि साइबर ठगी से जुडे मामले में बिना सोचे समझे पूरे बैंक खाते को फ्रीज नहीं किया जाए। अदालत ने कहा कि पांच सौ रुपए का संदेहास्पद लेन-देन होने पर पांच लाख रुपए वाले पूरे बैंक खाते तो अनिश्चित काल के लिए सीज नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने मामले में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश साइबर ठगी से जुडी सौ से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि इस फैसले का मकसद साइबर ठगी की जांच में कोई बाधा डालना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच व बेगुनाह नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है। जब जांच एजेंसी फर्जी खातों और बेगुनाह खाताधारक के बीच अंतर करेगी, तभी साइबर ठगी के खिलाफ मजबूती से लडाई होगी।

खाताधारक नहीं जाएगा दूसरे राज्य

अदालत ने कहा कि यदि प्रदेश के बाहर की किसी जांच के आधार पर खाता फ्रीज किया गया है, तो राजस्थान पुलिस और बैंक के अधिकारी स्वयं संबंधित राज्य की एजेंसी से संपर्क कर स्पष्टीकरण प्राप्त करेंगे। किसी नागरिक को केवल यह पता लगाने के लिए दूसरे राज्य की यात्रा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। अदालत ने इसके लिए डीजी और साइबर क्राइम प्रभारी को एक माह में इस संबंध में परिपत्र जारी करने को कहा है। अदालत ने राज्य स्तर पर एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा है, जो खातों को लंबे समय तक फ्रीज रखने से जुड़ी शिकायतों की निगरानी करेगा। बैंकों को भी तुरंत तालमेल के लिए नोडल या शिकायत अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट की जारी गाइडलाइंस

स्पष्ट आधार जरूरी-बिना किसी ठोस जानकारी के आधार पर खाते को अनिश्चित काल के लिए पूरी तरह डेबिट-फ्रीज नहीं किया जाएगा।

संबद्धता के सबूत- पाबंदी लगाने से पहले जांच अधिकारी को अपराध और संबंधित खाते के बीच प्रथम दृष्टया संबंध के सबूत रिकॉर्ड दर्ज करने होंगे।

सिर्फ विवादित रकम पर रोक-जहां विवादित रकम की पहचान संभव हो, वहां पूरे खाते को फ्रीज करने के बजाय केवल उस निश्चित राशि पर होल्ड लगाया जाएगा।

व्यापक पाबंदी के कारण-म्यूल अकाउंट, जानबूझकर की गई भागीदारी या बार-बार संदिग्ध ट्रांजेक्शन के मामलों में यदि पूरे खाते को फ्रीज करना जरूरी हो, तो उसके लिखित कारण केस डायरी में दर्ज करने होंगे।

अदालत की मंजूरी-यदि जांच एजेंसी संपत्ति अटैच करना चाहती है, तो मामले को नियमानुसार सक्षम कोर्ट या मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाना होगा।

समय-समय पर समीक्षा- केवल जांच लंबित होने के आधार पर खाता अनिश्चित काल तक फ्रीज नहीं रहेगा। अधिकारी समय-समय पर इसकी जरूरत की समीक्षा करेंगे।

अंतर्राज्यीय शिकायत पर सुनवाई-दूसरे राज्य से मिली साइबर शिकायत के आधार पर खाताधारक की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा-खाताधारक की शिकायतों का निवारण यथासंभव इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या वीसी के जरिए किया जाएगा।