प्रतिबंधित पीएफआई, उसके 20 सदस्यों पर आरोप तय करने का आदेश

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नई दिल्ली, 11 जुलाई । दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके 20 सदस्यों के खिलाफ औपचारिक रुप से आरोप तय करने का आदेश दिया है। सभी आरोपित शनिवार को कोर्ट में पेश हुए और आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही। अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 29 जुलाई से इस मामले में ट्रायल शुरु करने का आदेश दिया।

इसके पहले 5 जून को कोर्ट ने इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत आरोप तय किया था। कोर्ट ने सभी आरोपितों के आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन एकत्र करने, आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने इत्यादि आरोपों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 153ए, यूएपीए की धारा 17, 18,19 20, 22बी, 38 और 39 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने पीएफआई के अलावा जिन आरोपितों पर आरोप तय करने का आदेश दिया, उनमें ओएम अब्दुल सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, वीपीएन एलामाराम, ई अबुबकर, प्रोफेसर पी कोया, एम मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल वाहिद सैत, एएस इस्माइल, मो. युनूस, मोहम्मद बशीर, शफीर केपी, जसीर केपी, शाहिद नासीर, वसीम अहमद, मो. शाकिफ, मो. फारुख रहमान और यासिर हसन शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2022 को पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार ने यूएपीए की धारा 3(1) के अधिकारों के तहत ये प्रतिबंध लगाया था। केंद्र सरकार ने पीएफआई के सहयोगी संगठनों रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राईट्स आर्गनाइजेशन, नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन केरल को भी प्रतिबंधित किया है।