डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक में पीएचडी स्तर तक शोध की सुविधा होगी उपलब्ध

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लखनऊ, 07 मई । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक ऐसा स्मारक आकार ले रहा है, जो केवल ईंट-पत्थरों का ढ़ांचा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, संविधान और बाबा साहेब के विचारों का जीवंत केंद्र बनने जा रहा है। लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र में निर्माणाधीन भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। इसका निर्माण जुलाई 2026 में पूरा हो जाएगा।

ऑडिटोरियम का कार्य अंतिम चरण में

आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने बताया कि लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र में ईदगाह के सामने लगभग 2.5 एकड़ भूमि पर भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र बन रहा है। स्मारक के लिए इसकी शुरुआती अनुमानित लागत 45.04 करोड़ थी, लेकिन ऑडिटोरियम, फिनिशिंग और बाहरी विकास सहित अतिरिक्त कार्यों के चलते वर्तमान लागत 81 करोड़ रुपए से 100 करोड़ रुपए के लगभग पहुंच गई है। इसके निर्माण के लिए दो चरणों में भूमि आवंटन होने के साथ ही दो चरणों में बजट भी जारी हुआ है। स्मारक का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन 500 सीटों वाले अत्याधुनिक ऑडिटोरियम का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है।

डॉ. आंबेडकर शोध केंद्र का निर्माण किया जा रहा

स्मारक परिसर में 25 फीट ऊंची डॉ. आंबेडकर की भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके अलावा तीन मंजिला प्रशासनिक भवन, आधुनिक संग्रहालय और फोटो गैलरी होगी, जो डॉ. आंबेडकर के जीवन, संघर्ष और संविधान निर्माण को प्रदर्शित करेगा। विशाल पुस्तकालय और शोध केंद्र भी बनाया जा रहा है। विशेष बात यह है कि यहां डॉ. आंबेडकर शोध केंद्र की स्थापना की जा रही है, जहां आंबेडकर विश्वविद्यालय के सहयोग से पीएचडी स्तर तक शोध की सुविधा उपलब्ध होगी। शोधार्थियों के लिए हॉस्टल और भोजन व्यवस्था भी परिसर में ही होगी।

डॉ. आंबेडकर के अस्थि कलश को स्थापित किया जाएगा

योगी सरकार इस स्मारक को तकनीकी रूप से भी आधुनिक बना रही है। यहां ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति, वर्चुअल रियलिटी शो और डिजिटल माध्यमों से बाबा साहेब के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आंबेडकर महासभा में सुरक्षित रखे गए डॉ. आंबेडकर के अस्थि कलश को यहां पूरे सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही विपश्यना ध्यान केंद्र भी बनाया जा रहा है, जिससे यह परिसर सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक शांति का केंद्र बन सके। परिसर में बेसमेंट, सबस्टेशन, पंप रूम, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, लैंडस्केपिंग, बाउंड्री वॉल और आकर्षक प्रवेश द्वार भी विकसित किया जा रहा है।