शिमला, 19 अक्टूबर । हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा (एचपीपीएस) के अधिकारी और शिमला में डीएसपी विजय कुमार रघुबंशी की बीमारी को लेकर गठित मेडिकल बोर्ड ने उनकी कॉक्सीडीनिया (रीढ़ के निचले हिस्से की हड्डी के आसपास दर्द) की शिकायत को वास्तविक माना है। इंदिरा गांधी अस्पताल शिमला के मेडिकल बोर्ड ने पुराने चिकित्सा रिकॉर्ड की समीक्षा और अधिकारी की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बीमारी में दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है और इलाज का असर हर मरीज में अलग-अलग हो सकता है।
मेडिकल बोर्ड की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब विजय कुमार के लंबे समय से मेडिकल रेस्ट पर रहने और नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने के मामले में गृह विभाग ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कराने का निर्णय लिया था। विभाग ने अधिकारी की बीमारी और लंबे समय तक आराम की जरूरत के संबंध में चिकित्सकीय राय मांगी थी। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बीमारी को वास्तविक बताते हुए इसके लंबे समय तक चलने की चिकित्सकीय संभावना का उल्लेख किया है।
इंदिरा गांधी अस्पताल शिमला के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार विजय कुमार को पहली बार 16 मार्च 2026 को हड्डी रोग विभाग में दिखाया गया था। उस समय उन्हें कॉक्सीडीनिया से पीड़ित पाया गया और शुरुआत में एक सप्ताह आराम करने की सलाह दी गई। बाद में आराम की अवधि तीन सप्ताह और बढ़ाई गई। इसके बाद वह हड्डी रोग विभाग में दोबारा फॉलोअप के लिए नहीं आए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विजय कुमार ने 27 मार्च को पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के हड्डी रोग विभाग में भी परामर्श लिया। वहां भी कॉक्सीडीनिया का निदान किया गया। इसके बाद 4 अप्रैल को ईएसआईसी बद्दी में डॉक्टर से परामर्श लिया, जहां इस बीमारी के लिए दवाएं दी गईं और दो सप्ताह आराम की सलाह दी गई।
विजय कुमार ने 5 मई को रीजनल स्पाइनल इंजरी सेंटर में भी जांच कराई। यहां भी कॉक्सीडीनिया की पुष्टि करते हुए उचित उपचार की सलाह दी गई। इसके बाद 12 मई को दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल शिमला में उनका उपचार किया गया और हल्की ड्यूटी करने की सलाह दी गई।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार विजय कुमार ने 19 मई 2026 को आईजीएमसी शिमला के एनेस्थीसिया विभाग में कॉक्सीडीनिया के उपचार के लिए गैंग्लियन इम्पार ब्लॉक प्रक्रिया कराई। इसके बाद से वह आईजीएमसी के न्यूरोसर्जरी विभाग के फॉलोअप में रहे। विभाग ने उन्हें 28 सितंबर 2026 तक मेडिकल रेस्ट की सलाह दी थी।
मेडिकल बोर्ड ने विजय कुमार रघुबंशी के पुराने चिकित्सा रिकॉर्ड की समीक्षा करने के साथ उनकी जांच भी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉक्सीडीनिया की बीमारी वास्तविक है। इसमें दर्द लंबे समय तक रह सकता है और अलग-अलग मरीजों में उपचार का असर भी अलग हो सकता है। इस तरह बोर्ड ने बीमारी की वास्तविकता और लंबे समय तक चलने वाले दर्द की चिकित्सकीय संभावना को स्वीकार किया है।
गृह विभाग के विशेष सचिव के 14 सितंबर 2026 के पत्र के बाद इंदिरा गांधी अस्पताल शिमला में मेडिकल बोर्ड का पुनर्गठन किया गया था। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की अध्यक्षता में गठित बोर्ड को विजय कुमार की चिकित्सकीय जांच करने और बीमारी की स्थिति पर राय देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
बोर्ड में एआईएमएसएस चमियाणा के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा, आईजीएमसी शिमला के हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश सूद, एआईएमएसएस चमियाणा के न्यूरोसर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिग्विजय ठाकुर और आईजीएमसी शिमला के मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राम सिंह सदस्य थे।
रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल बोर्ड ने 22 सितंबर को विजय कुमार रघुबंशी की जांच की। यह जांच गृह विभाग के पत्र और अस्पताल के पूर्व पत्राचार के क्रम में की गई थी।
विजय कुमार का तबादला दूसरी भारतीय रिजर्व बटालियन (सेकंड आईआरबीएन) सकोह जिला कांगड़ा में किया गया है। 10 अगस्त 2026 की सरकारी अधिसूचना में उनका नाम इस बटालियन में डीएसपी के रूप में स्थानांतरित किए गए अधिकारियों में शामिल था। शिमला जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने 16 सितंबर को उन्हें नई तैनाती के लिए तत्काल प्रभाव से रिलीव करने का आदेश जारी किया था।
गृह विभाग के 14 सितंबर के पत्र के अनुसार विजय कुमार 12 मार्च से 10 मई 2026 तक स्वास्थ्य खराब होने के कारण अर्जित अवकाश पर रहे थे। विभाग ने यह भी कहा था कि 11 मई से 19 मई के बीच उन्होंने बीमारी के कारण सौंपे गए महत्वपूर्ण सरकारी कार्य नहीं किए। हड्डी रोग विभाग की पर्चियों के आधार पर उनका मेडिकल रेस्ट समय-समय पर बढ़ाया गया था। विभाग के अनुसार 31 अगस्त की मेडिकल पर्ची में उन्हें चार सप्ताह और आराम करने की सलाह दी गई थी।
गौरतलब है कि विजय कुमार रघुबंशी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायत भी की है। आयोग ने तबादले, सरकारी वाहन, ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। आयोग ने उनकी चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार उपयुक्त ड्यूटी देने और शिकायत के कारण प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने की सिफारिश भी की है।