जयपुर, 23 अगस्त । राजधानी में रविवार को कालवाड़ से चांदपोल जा रही जेसीटीएसएल की लो-फ्लोर बस में अचानक आग लग गई। चलती बस के इंजन वाले हिस्से से धुआं निकलते देख यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चालक ने बस रोककर सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा। गनीमत रही कि हादसे में किसी यात्री को नुकसान नहीं पहुंचा।
जानकारी के अनुसार रूट संख्या 24 की बस RJ14PD 8538 के इंजन वाले हिस्से में अचानक आग लगी। आग बढ़ने के साथ बस से धुआं उठने लगा। आग का पता चलते ही यात्रियों ने तत्काल बस से बाहर निकलना शुरू कर दिया। देखते ही देखते बस खाली हो गई। प्रारंभिक तौर पर इंजन में तकनीकी खराबी को आग लगने की वजह माना जा रहा है।
घटना के दौरान बस में रखा अग्निशमन यंत्र यानी फायर एक्सटिंग्विशर खाली मिला। ऐसे में आग बुझाने के लिए तत्काल पीछे से आ रहे पानी के टैंकर को रुकवाया गया। टैंकर की मदद से पानी डालकर आग पर काबू पाया गया। इससे आग को ज्यादा फैलने से रोक लिया गया। आग बुझने के बाद बस को मौके से हटा दिया गया। चलती बस में आग लगने और फायर एक्सटिंग्विशर के खाली मिलने से जेसीटीएसएल की बसों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लो-फ्लोर बसें रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को शहर के अलग-अलग रूट पर लेकर चलती हैं। ऐसे में इंजन, वायरिंग, ब्रेक सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच जरूरी है।
एम्पलाइज यूनियन एटा के संगठन सचिव विपिन के अनुसार टोडी डिपो से संचालित बसों के रखरखाव का काम मातेश्वरी कंपनी के जिम्मे बताया जा रहा है। आरोप है कि बसों के रखरखाव की प्रक्रिया महज कागजी कार्रवाई तक सीमित है और जमीनी स्तर पर बसों की तकनीकी स्थिति की पर्याप्त जांच नहीं की जा रही।
आग लगने वाली मिनी बस की निर्धारित संचालन अवधि मार्च में पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद जेसीटीएसएल प्रबंधन की ओर से संचालन अवधि तीन माह और बढ़ाने की बात सामने आई है। आरोप है कि अवधि बढ़ाने से पहले बस की समुचित तकनीकी जांच नहीं की गई। इसके अलावा 50 डबल डेकर बसों के रखरखाव का काम भी इसी कंपनी को दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बसों की फिटनेस जांच के दौरान अग्निशमन यंत्र की स्थिति कितनी गंभीरता से जांची जाती है। यदि बस में आग बुझाने का उपकरण मौजूद है, लेकिन वह खाली या खराब है तो आपात स्थिति में यात्रियों के पास तत्काल बचाव का साधन नहीं रहेगा। रविवार को पीछे से आ रहे पानी के टैंकर की मदद मिल गई, लेकिन हर बार ऐसी मदद समय पर मिले, यह जरूरी नहीं। जयपुर में इससे पहले भी चलती बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। प्रत्येक घटना के बाद बसों की फिटनेस और रखरखाव को लेकर सवाल उठते हैं, लेकिन कुछ समय बाद व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटती दिखाई देती है।