प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता त्रिलोकचंद शर्मा ने बताया कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन फिर भी पुलिस ने उसे आरोपित किया है। पूरक चार्जशीट में आरोपी के पिता का नाम शेरी नलवाला है, जबकि उसके पिता का नाम शेरसिंह है। सीबीआई ने उसके पिता का सरनेम गलत लिखा है। प्रार्थना पत्र के साथ दस्तावेज पेश कर कहा गया कि घटना के समय उसकी उम्र 16 साल एक महीने ही थी। इसके बावजूद भी उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर उसे भगोड़ा किया और उसकी संपत्ति को कुर्क व नीलाम करने के आदेश जारी कर दिए। इसलिए उसे भगोड़ा घोषित करने और कुर्की व नीलामी की कार्रवाई के आदेश को रद्द किया जाए। इसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले की ट्रायल एडीजे कोर्ट-4 में चल रही है और उसमें 83 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। प्रार्थी गिरफ्तारी वारंट के बावजूद भी पेश नहीं हुआ। इसलिए उसे भगोड़ा घोषित किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनकर कहा कि साक्ष्यों से यह साबित है कि सीबीआई ने चार्जशीट में आरोपी 21 साल का बताया है, जबकि उसकी जन्म तिथि 3 अगस्त 1998 है और वह घटना के समय नाबालिग था। ऐसे में उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को सुनवाई के लिए भेजा जाना उचित होगा।