राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि, स्टारलिंक को अनुमति न दे सरकार: स्वदेशी जागरण मंच

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नई दिल्ली, 13 अक्टूबर । स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने केंद्र सरकार से ऐलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं का लाइसेंस न देने की मांग की है।

एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने मंगलवार को जारी एक बयान में केंद्र सरकार से भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को वाणिज्यिक उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया है। उन्होंने मस्क की उद्योगपति मुकेश अंबानी और परोक्ष रूप से सरकार के खिलाफ की गई टिप्पणियों को ‘‘गैर-जिम्मेदाराना’’ बताया।

अश्विनी महाजन ने कहा कि यदि स्टारलिंक भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं करती है, तो केंद्र सरकार उसे लाइसेंस देने से इनकार कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्क नियामकीय शर्तों से निराश होकर या सरकार पर जन दबाव बनाकर लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। महाजन ने कहा कि स्टारलिंक की उपग्रह के बीच लेजर संपर्क तकनीक से भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक के देश के बाहर स्थित बुनियादी ढांचे से गुजरने की आशंका है, जिससे कानूनी निगरानी मुश्किल हो सकती है।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उपग्रह इंटरनेट का इस्तेमाल शत्रुतापूर्ण तत्व, तस्कर और उग्रवादी समूह कर सकते हैं। दरअसल मस्क ने शनिवार को मीडिया खबरों के स्क्रीनशॉट साझा किए थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि रिलायंस से जुड़ी कंपनियों ने भाजपा के सोशल मीडिया अभियानों को बढ़ावा देने और उसे राजनीतिक चंदा देने में भूमिका निभाई। इससे पहले उन्होंने अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर संबोधित किया था और उन पर एकाधिकार बचाने का आरोप लगाया था। रिलायंस ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है।

महाजन ने कहा कि स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि भारत उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध नहीं करा सकेगा। उन्होंने दावा किया कि स्वदेशी सेवाएं राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए स्टारलिंक से काफी सस्ती हो सकती हैं और दूरदराज के इलाकों तक किफायती इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर भी सकती हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच की स्टारलिंक से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं यूक्रेन, ईरान, रूस, चीन, ताइवान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील, वेनेजुएला, सूडान और कई अन्य देशों के अनुभवों पर आधारित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषण के लिए सबसे अहम केस स्टडीज़ यूक्रेन, ईरान, रूस, चीन और ताइवान माने जाते हैं।

एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि यह सच है कि भारत ने अमेरिका, यूरोप और रूस जैसे देशों की तुलना में स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देर से कदम रखा, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भारत तेज़ी से ग्लोबल स्पेस क्षेत्र में एक अहम और मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरा है। भारत के पीएसएलवी और चंद्रयान मिशन पहले ही ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित कर चुके हैं।

वहीं, गगनयान, निसार, चंद्रयान-4, शुक्रयान और इंडियन स्पेस स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट स्पेस सेक्टर में भारत की बढ़ती अहमियत के प्रतीक बन रहे हैं। भारत स्पेस मौसम विज्ञान, कम्युनिकेशन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई देशों की मदद भी कर रहा है। इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में, प्राइवेट स्टार्टअप अब भारत के पब्लिक सेक्टर के उद्यमों के साथ-साथ अपनी जगह बना रहे हैं।