जयपुर, 30 जुलाई । राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए के पीआरएन जोन 18 व 19 में बड़ी संख्या में हुए अतिक्रमणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जेडीए के अधिवक्ता को कहा है कि वह इन दोनों जोन में बीते दस साल में तैनात हुए अफसरों का विवरण और उनके मौजूदा पदस्थापन की जगह भी बताए। इसके साथ ही अदालत ने जेडीए को कहा है कि वह 12 अगस्त तक शपथ पत्र पेश कर प्रवर्तन अधिकारी का बयान सत्यापित करें कि यहां एचटी लाइनों के नीचे बड़ी संख्या में अतिक्रमण हो गए हैं। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश साहेब सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान स्थानीय प्रवर्तन अधिकारी गंगाराम अदालत में पेश हुए। प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि उन्होंने गत 24 अप्रैल को ही कार्यभार संभाला है। यहां हाई टेशन लाइनों के आसपास और उसके नीचे करीब आठ सौ मकान और दो सौ दुकानें बनी हुए हैं। वहीं जेडीए के जोन उपायुक्त की ओर से शपथ पत्र पेश कर कहा गया कि यहां कई निर्माण दस साल से भी अधिक पुराने हैं। इसके अलावा जेडीए के अधिवक्ता अमित कुड़ी ने अदालत को बताया कि करीब 206 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया जा चुका है। इसके साथ-साथ मौके पर हुए नए अतिक्रमणों को तत्काल प्रभाव से हटाया जा रहा है। अजमेर रोड से वंदे मातरम रोड़ तक करीब डेढ किमी एचटी लाइन कॉरिडोर में कराए सर्वे में करीब 800 मकान व 200 दुकान प्रभावित पाई गई हैं। इसके साथ ही मौजूदा प्रवर्तन अधिकारी के कार्यकाल में कोई बड़ा नया अतिक्रमण नहीं हुआ है। इस पर अदालत ने दस साल में यहां तैनात प्रवर्तन अधिकारियों की विस्तृत जानकारी मांगते हुए जेडीए को मौजूदा हालात की रिपोर्ट देने को कहा है। जनहित याचिका में अधिवक्ता रामरख शर्मा ने बताया कि दोनों जोन में एचटी लाइन के दोनों ओर 60 फीट की सेक्टर रोड़ है। कई लोगों ने यहां तीस फीट तक अतिक्रमण कर लिया है, लेकिन जेडीए ने कोई कार्रवाई नहीं की।