नई दिल्ली, 20 अगस्त । मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को अनुव्रत भवन में रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैंप) योजना के अंतर्गत आयोजित ‘मेगा कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम’ का शुभारंभ किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि आज का प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम ‘4-पी रिफॉर्म’ (पॉलिसी, प्रोसेस, परफॉर्मेंस और पार्टनरशिप) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार और उद्यमियों की साझेदारी से दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और राजधानी के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आधुनिक कौशल, तकनीक, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए दिल्ली सरकार निरंतर प्रयासरत है। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार के दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) द्वारा किया गया। इसमें 200 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों ने भाग लिया है।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा आरएएमपी (रैंप) योजना के तहत दिल्ली के लिए 49.74 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना के माध्यम से जनवरी 2027 तक 30,000 से अधिक एमएसएमई को आधुनिक कौशल व प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, वहीं 10,000 से अधिक व्यवसायों को जीईएम और ओएनडीसी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंच प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने एमएसएमई को दिल्ली की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी नहीं, बल्कि मेहनत करने वालों और उद्यमियों की राजधानी है। सरकार का लक्ष्य एमएसएमई को वित्त, प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार इन चारों स्तंभों पर मजबूत सहयोग प्रदान करना है। दिल्ली के छोटे और मध्यम उद्यम हमारी अर्थव्यवस्था का आधार हैं।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण केंद्र और दिल्ली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है, जिसका सीधा लाभ दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों को मिल रहा है। दिल्ली सरकार व्यापारियों, उद्योगपतियों और उद्यमियों से जुड़े मुद्दों को केंद्र के साथ लगातार उठाती रहेगी। दिल्ली में 2.48 लाख से अधिक स्टार्टअप और 125 यूनिकॉर्न काम कर रहे हैं। दिल्ली को देश में स्टार्टअप और यूनिकॉर्न के क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाने के लिए सरकार उद्यमियों और युवा स्टार्टअप संस्थापकों के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली क्रेडिट गारंटी योजना (डीकेजीएस) की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत पात्र छोटे और लघु उद्यमों को बिना गारंटी के 10 करोड़ रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने में मदद की जा रही है। इस ऋण पर सरकार 95 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी देती है। 1 फरवरी 2026 के बाद से चालू वित्त वर्ष में 10,505 गारंटियों के जरिए 4,806 करोड़ रुपये की गारंटी मंजूर की जा चुकी है।
इस अवसर पर दिल्ली के उद्योग मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि जब हमारी सरकार ने कार्यभार संभाला, तब हमें करीब 12,000 औद्योगिक इकाइयां मिलीं, जिनका बुनियादी ढांचा गंभीर रूप से जर्जर था और वर्षों से कई समस्याएं लंबित थीं। आज करीब 500 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 700 करोड़ रुपये के अन्य कार्य पाइपलाइन में हैं। सरकार औद्योगिक संपत्तियों, जिसमें स्थानांतरित औद्योगिक इकाइयां भी शामिल हैं, को फ्रीहोल्ड अधिकार प्रदान करने के लिए एक व्यापक नीति पर भी काम कर रही है ताकि उद्योगों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान किया जा सके और औद्योगिक क्षेत्र को स्थिरता मिले।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की गारंटी सहायता के माध्यम से करीब 10,500 लाभार्थियों के लिए लगभग 4,800 करोड़ रुपये के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केवल ऋण तक सीमित न रहते हुए, हम एमएसएमई को जीईएम, ई-कॉमर्स और निर्यात बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सहायता दे रहे हैं। स्वीकृतियों को सरल बनाने और नियामकीय बाधाओं को कम करने के लिए एआई-सक्षम सिंगल-विंडो एमएसएमई पोर्टल विकसित किया जा रहा है। महिला उद्यमियों के लिए विशेष सहायता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है और इस दिशा में तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाया जा रहा है।