फायर लाइन के नाम पर अदवाणी के जंगलाें में पेड़ों के कटान का विराेध शुरू

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नई टिहरी, 16 अगस्त । प्रसिद्ध हेंवलघाटी के अदवाणी गांव के जंगल में फायर लाइन काटने के नाम पर चीड़ के हरे भरे पेड़ों के कटान के विरोध में महिलाओं ने घन लगे पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया। कहा कि यदि पेड़ों को काटा गया तो एक और चिपको आंदोलन शुरू करेंगे।

नरेंद्रनगर ब्लॉक के अंतर्गत अदवाणी के जंगल को बचाने के लिए हेंवल घाटी की महिला संगठन, चिपको आंदोलन के कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने सरकार से शीघ्र पेड़ों के कटान पर रोक लगाने की मांग की है।

87 वर्षीय वयोवृद्ध चिपको नेत्री सुदेशा बहन के नेतृत्व में महिलाओं ने अदवाणी के जंगल जाकर लोगों से पेड़ों को बचाने की अपील की। कहा कि अदवाणी का जंगल चिपको आंदोलन के लिए प्रसिद्ध रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी से जंगल बचाने के लिए आगे आने को कहा। बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी ने कहा कि फायर लाइन काटने के नाम उत्तराखंड के जंगलों को कटाने की साजिश की जा रही है। ग्राम प्रधान विजय भंडारी ने वन विभाग पर बिना ग्राम पंचायत को सूचना दिए जंगल कटाने का आरोप लगाया। अरण्य रंजन ने कहा कि फायर लाइन के नाम जंगल काटने की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग उठाई।

जिला पंचायत सदस्य शीशपाल सजवाण ने कहा कि किसी कीमत पर अपने जंगल को नहीं कटाने देंगे। इसके लिए यदि लंबा संघर्ष करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटाएंगे। सामाजिक कार्यकर्ता धूम सिंह मंद्रवाल ने कहा कि अदवाणी का जंगल क्षेत्र के लोगों की विरासत है, सरकार के इस कुकृत्य को सफल नहीं होने दिया जाएगा। किशन सिंह रावत ने कहा कि अदवाणी के जंगल बचाने को आए ग्रामीणों की वजह से अदवाणी के लोगों का मनोबल और मजबूत हुआ है। इस मौके पर संदीप पैन्यूली, फूलदास डौडिंया, सुविधा देवी, रोशनी देवी, सरिता मनवाल, सुनीता भंडारी, प्रतिमा देवी मौजूद रहे।