जयपुर, 25 सितंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आपराधिक मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सीसीटीवी फुटेज जैसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को सबूत के तौर पर उपयोग किया जा रहा है और इसे आरोप पत्र के साथ अदालत में पेश किया गया है तो उसकी कॉपी आरोपित को देना जरूरी है। जस्टिस अनूप कुमार की एकलपीठ ने यह आदेश अमर सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने करौली जिले की निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीसीटीवी रिकॉर्डिंग वाली डीवीडी और पेन ड्राइव की कॉपी देने से इनकार कर दिया था।
अदालत ने अपने आदेश में दोहराया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपित को निष्पक्ष सुनवाई का मौलिक अधिकार प्राप्त है। जब तक अभियोजन के इलेक्ट्रॉनिक सबूत आरोपित को नहीं मिलेंगे, वह अपना बचाव प्रभावी तरीके से नहीं कर पाएगा।
याचिका में अधिवक्ता राहुल शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र पेश किया था। पुलिस ने चार्जशीट के साथ घटना की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग वाली डीवीडी और पेन ड्राइव भी कोर्ट में जमा की थी। अदालत की ओर से आरोपित को चार्जशीट की कॉपी दी गई, लेकिन ये इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उसे उपलब्ध नहीं कराए गए। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर आरोपित ने ट्रायल कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर इसकी मांग की थी। जिसे ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि चार्जशीट की कॉपी लेते समय आरोपित ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की मांग नहीं की थी। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।