मंडी के वेदांत कुटीर में पांच दिवसीय शंकराचार्य जयंती समारोह का भव्य समापन

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मंडी, 21 अप्रैल । मंडी के वेदांत कुटीर में आयोजित पांच दिवसीय शंकराचार्य जयंती समारोह का मंगलवार को विधिवत समापन हो गया। इस अवसर पर मंडी वासियों और वेदांत कुटीर की ओर से समारोह में पधारे सभी संतों का आभार साध्वी सेवानंद सरस्वती ने व्यक्त किया। समारोह के दौरान मौजूद महान संतों ने शंकराचार्य जयंती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आदि शंकराचार्य के जीवन, उनके अद्वैत वेदांत दर्शन और समाज को दिए गए संदेशों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।कार्यक्रम में मंत्रोच्चार के साथ विशेष आरती का आयोजन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। समारोह के समापन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया। इस दौरान आध्यात्मिक एवं वेदांत परंपरा के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में ब्रह्मचारी प्रणव चेतन को विधिवत सन्यास दीक्षा प्रदान की गई, जिसके उपरांत उनका नया नाम स्वामी प्रणवानंद सरस्वती रखा गया। समारोह में वेद मंत्रों के उच्चारण, पूजन एवं हवन के साथ सन्यास दीक्षा की सभी परंपराएं पूर्ण की गईं।

इस अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं ने कहा कि सन्यास ग्रहण करना केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि पूर्ण त्याग, तपस्या और लोक कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने का संकल्प है।

दीक्षा के पश्चात स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य आत्मज्ञान और सेवा है, तथा वे इसी मार्ग पर चलते हुए समाज के कल्याण के लिए कार्य करेंगे। श्रद्धालुओं ने बाहर से आएं सभी संतों को आशीर्वाद प्राप्त कर धन्य हुए।