सीहोर, 27 अप्रैल । खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारियों ने अपनी लंबित समस्याओं को लेकर सोमवार को विरोध जताया। कृषि आदान व्यापारियों का आरोप है कि अमानक उत्पादों की शिकायत आने पर कार्रवाई निर्माता कंपनियों पर नहीं, बल्कि विक्रेताओं पर की जाती है, जिससे उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, देशभर के कृषि आदान व्यापारियों ने 27 अप्रैल को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, जबकि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और सरकार को ज्ञापन भी सौंपे हैं। इसी क्रम में सीहोर में कृषि व्यापारी संघ के पदाधिकारियों ने भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर जमील खान को सौंपा। संघ के प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि विभागीय कार्रवाई में अक्सर विक्रेताओं को दोषी ठहराया जाता है, जबकि वे केवल सीलबंद उत्पाद बेचते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि जब किसी खाद, बीज या कीटनाशक का नमूना फेल होता है, तो निर्माता कंपनी के बजाय विक्रेता पर केस दर्ज किया जाता है और लाइसेंस तक निरस्त कर दिए जाते हैं। उनका कहना है कि गुणवत्ता की जिम्मेदारी कंपनियों की होनी चाहिए, न कि दुकानदारों की।
ये हैं मुख्य मांगें
– सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन लिंकिंग को अपराध घोषित किया जाए।
– खाद की डिलीवरी डीलर के विक्रय केंद्र तक सुनिश्चित की जाए।
– उर्वरकों पर डीलर मार्जिन बढ़ाकर कम से कम 8% किया जाए।
– अवैध बीजों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगे।
– सीलबंद उत्पाद के मामले में विक्रेता को दोषी नहीं, गवाह माना जाए
– कंपनियों को एक्सपायर्ड स्टॉक वापस लेने के लिए बाध्य किया जाए
लाइसेंस और नियमों में बदलाव की मांग
व्यापारियों ने यह भी मांग की कि छोटी-छोटी त्रुटियों पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई रोकी जाए और 21 दिन में स्वतः बहाली का प्रावधान हो। साथ ही हर साल अनिवार्य दस्तावेज जोड़ने की प्रक्रिया खत्म की जाए और दोहरी लाइसेंस व्यवस्था को समाप्त किया जाए। संघ का कहना है कि कई बार झूठी शिकायतों के जरिए व्यापारियों को परेशान किया जाता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई से पहले जिला स्तर पर जांच समिति गठित की जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा
कृषि आदान व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि कृषि उत्पादन और किसानों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।