अजमेर, 24 जनवरी। प्रतिरोध साहित्य का मुख्य दायित्व है जिसका गैर-व्यावसायिक साहित्यिक पत्रिकाएं पूरे दम-खम से निर्वाह करती हैं। प्रतिरोध की आवाज को जीवित रखने के लिए इन पत्रिकाओं का बचे और बने रहना बहुत जरूर है। यह विचार प्रख्यात साहित्यकार और कथाक्रम पत्रिका के संपादक शैलेंद्र सागर ने व्यक्त किए।
वे अजमेर में आयोजित दो दिवसीय लघु पत्रिका सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। राजस्थान साहित्य अकादमी और रजा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन अजमेर से निकलने वाली प्रतिष्ठित पत्रिका लहर के संपादक और कवि स्व. प्रकाश जैन के जन्मशताब्दी उत्सव के अंतर्गत किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता समयांतर पत्रिका के संपादक पंकज बिष्ट ने की। इस अवसर पर मंच पर राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सोलंकी और साहित्यकार कल्पना भंडारी भी उपस्थित थीं।
शैलेंद्र सागर ने कहा कि गैर-व्यावसायिक होने के कारण ये पत्रिकाएं पाठकों के अलावा किसी और पर निर्भर नहीं रहतीं। संपादक अपने स्रोतों और श्रम से पत्रिकाओं को प्रकाशित कराते हैं। इसके कारण इनके माध्यम से किया गया प्रतिरोध विश्वसनीय होता है। इसके अलावा ये पत्रिकाएं प्रतिभाशाली रचनाकारों की नयी पीढ़ियां तैयार करने का काम निरंतर करती रहती हैं। इतना ही नहीं इन पत्रिकाओं के माध्यम से साहित्य और समाज में दलित विमर्श, स्त्री विमर्श जैसे अनेक विमर्शों की शुरुआत हुई है।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि नई पीढ़ी न केवल हिंदी भाषा से बल्कि हिंदी साहित्य से भी लगातार दूर हो रही है। इसके अलावा बदली हुई परिस्थितियों में एक समय साहित्य का सबसे जागरूक पाठक रहा मध्यम वर्ग भी साहित्य से दूर हो रहा है। यह न केवल पत्रिकाओं के लिए बल्कि हिंदी साहित्य के लिए भी एक बड़ा संकट है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ संपादक पंकज बिष्ट ने कहा कि किसी समय व्यक्ति और समाज के जीवन में गैर-व्यावसायिक साहित्यिक पत्रिकाओं का जो स्थान था, उसे अब डिजिटल मीडिया ने घेर लिया है। तकनीक के इस दौर में अपनी जगह बनाना और अपने महत्व को कायम रखना लघु पत्रिकाओं के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि लोग पढ़ना नहीं चाहते या साहित्य से जुड़ना नहीं चाहते। अब लगभग हर शहर में आयोजित होने वाले लिटरेचर फेस्टिवल में बढ़ रही भीड़ इस बात का प्रमाण है कि साहित्य से लोगों का लगाव और अपेक्षा अभी भी कम नहीं हुई है। बस उन्हें किस तरह से पत्रिकाओं के साथ जोड़ा जाए, यही सबसे बड़ा सवाल है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में समारोह की प्रस्तावना करते हुए अनंत भटनागर ने कहा कि एक समय हिंदी साहित्य जगत में अत्यंत सीमित साधनों से लहर जैसी पत्रिका निकालकर स्व. प्रकाश जैन ने अजमेर को स्थापित किया था। इस पत्रिका में न सिर्फ उस समय के सभी बड़े साहित्यकार प्रकाशित हुए बल्कि इस पत्रिका में प्रकाशित कई नवोदित लेखक और कवि आज के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। उनके योगदान का कृतज्ञतापूर्ण स्मरण करने के उद्देश्य से पिछले वर्ष अगस्त से प्रकाश जैन जन्मशताब्दी उत्सव की शुरुआत की गई है।
इस अवसर पर लघु पत्रिकाओं के राजस्थान स्थित वरिष्ठ संपादकों हेतु भारद्वाज, कमर मेवाड़ी और प्रेमकृष्ण शर्मा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्व. प्रकाश जैन की अप्रकाशित कविताओं के संग्रह ‘बदतमीज हो गया है मौसम’ का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनंत भटनागर ने किया जबकि आभार प्रदर्शन संगीत जैन ने किया।
इसके पश्चात् प्रकाश जैन : स्मृतियों की लहर तथा लहर से आज तक : लघु पत्रिकाओं का सफर विषय पर सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें हेतु भारद्वाज, सदाशिव श्रोत्रिय किशन दाधीच, रचना यादव, विनोद तिवारी, आदि सहभागी हुए।