हरिद्वार, 03 अक्टूबर । 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन को लेकर पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव ने कहा कि हरिद्वार में संस्कृत और संस्कृति का दिव्य संगम होने जा रहा है। यह सम्मेलन 29 से 31 अक्टूबर तक पतंजलि विवि में होगा।
स्वामी रामदेव ने कहा कि हमारे सभी शास्त्र और सनातन की पूरी विरासत संस्कृत में है। भारत के संस्कार, सभ्यता, योग, अध्यात्म और समृद्ध संस्कृति जिस भाषा में सुरक्षित है, उसका विराट संगम इस सम्मेलन में होगा। यह केवल विमर्श का मंच नहीं, भारत की ज्ञान-संपदा के वैज्ञानिक पक्ष को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने बताया कि पतंजलि का संकल्प ‘विरासत और विज्ञान, शोध और बोध, दृष्टि और दक्षता’ है। प्राचीन विद्याएं केवल अतीत की धरोहर नहीं, वर्तमान चुनौतियों का समाधान भी हैं।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में योग, आयुर्वेद, दर्शन, वेद-वेदांत, व्याकरण, साहित्य, इतिहास, पुरातत्व पर गहन विमर्श और शोधपत्र प्रस्तुत होंगे। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रकांड विद्वान, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। विद्यार्थियों में भारी उत्साह है, अभी तक लगभग 1000 पंजीकरण हो चुके हैं, इसलिए पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अक्टूबर कर दी गई है।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संस्कृति प्रेमियों से सहभागिता का आह्वान किया और कहा कि अपनी जड़ों को जानना ही भविष्य को मजबूत बनाता है।