हरिद्वार, 07 नवंबर । दीपावली पर अंधविश्वास के नाम पर उल्लुओं के शिकार और वन्यजीवों की तस्करी की आशंका को देखते हुए वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन अलर्ट हो गया है। हरिद्वार के सभी वन क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों में दिन-रात गश्त की जा रही है और क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एहतियात के तौर पर अधिकारियों और वनकर्मियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
दरअसल, दीपावली के दौरान समाज में फैले अंधविश्वास के चलते उल्लू की बलि देने और उसके अंगों का तांत्रिक क्रियाओं में इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है। मान्यता है कि ऐसा करने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है, जबकि इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है। इसी तरह की भ्रांतियों के कारण उल्लुओं के अवैध शिकार और तस्करी का खतरा बढ़ जाता है।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि दीपावली के दौरान वन क्षेत्रों में वन तस्करों के प्रवेश की आशंका को देखते हुए सभी रेंजों में अलर्ट जारी किया गया है। अलग-अलग टीमें बनाकर नियमित गश्त कराई जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हरिद्वार, श्यामपुर, खानपुर, लक्सर और चिड़ियापुर रेंज के साथ ही राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला और हरिद्वार रेंज में भी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क किया गया है।
वन विभाग ने उल्लू के साथ ही बाघ, गुलदार और मॉनिटर लिजार्ड सहित अन्य संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। जंगल से सटे संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। राजाजी टाइगर रिजर्व की रेंज अधिकारी आभा रतूड़ी ने बताया कि त्योहार को देखते हुए पार्क प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। क्यूआरटी तैनात करने के साथ दिन और रात में गश्त कराई जा रही है। कर्मचारियों की छुट्टियों पर भी रोक लगाई गई है। वन विभाग का कहना है कि दीपावली के दौरान अंधविश्वास और अवैध गतिविधियों के नाम पर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।