प्रयागराज, 29 जुलाई । मूक्स के माध्यम से विद्यार्थी घर बैठे देश के श्रेष्ठ शिक्षकों से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इससे उच्च शिक्षा को अधिक व्यापक और सुलभ बनाने में मदद मिल रही है। यह बात उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर एवं निदेशक प्रो. जितेन्द्र पाण्डेय ने बुधवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय में स्वयम मूक्स के विकास पर शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में कही।
मुख्य वक्ता प्रो. जितेन्द्र पाण्डेय ने कार्यशाला में स्वयम एवं मूक्स की अवधारणा, पाठ्यक्रम संरचना, ई-सामग्री विकास, वीडियो व्याख्यान निर्माण, मूल्यांकन प्रणाली, गुणवत्ता मानकों तथा पाठ्यक्रम प्रस्तुतीकरण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से स्वयम पाठ्यक्रम प्रस्ताव तैयार करने, मॉड्यूल निर्माण, शिक्षण परिणाम, मूल्यांकन योजना तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया।
सेन्टर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल शिक्षा का है। प्रत्येक शिक्षक के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ कदम मिलाने के लिए शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनना होगा।
कुलपति ने कहा कि सभी मुक्त विश्वविद्यालयों का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। स्वयम भारत सरकार का ऐसा राष्ट्रीय मंच है, जिसके माध्यम से इस लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय द्वारा स्वयम के साथ किए जा रहे प्रयासों को नई गति देगी और गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के निर्माण में सहायक होगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यशाला के बाद विश्वविद्यालय के अधिक से अधिक पाठ्यक्रम स्वयम मंच पर उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के शिक्षार्थियों को लाभ मिलेगा। विश्वविद्यालय स्वयम और स्वयम प्रभा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण डिजिटल पाठ्यक्रम विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यशाला के संयोजक एवं सेन्टर फॉर ऑनलाइन एजुकेशन के निदेशक प्रो. ए.के. मलिक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल शिक्षा एवं ऑनलाइन अधिगम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों, तकनीकी सत्रों तथा प्रतिभागियों को दिए जाने वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण की जानकारी दी।
जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि कार्यशाला में विश्वविद्यालय की विभिन्न विद्या शाखाओं के निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी एवं शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताते हुए डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताया। युवा शिक्षकों में कार्यशाला को लेकर विशेष उत्साह रहा। उन्होंने कहा कि इस पहल से विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
कार्यशाला का संचालन डॉ. तूबा फातमा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जूमी सिंह ने किया। दो दिवसीय कार्यशाला का समापन गुरुवार को होगा।