उस्मानपुर में तीन महिलाओं की हत्याओं के आरोप से जावेद को बरी करने का आदेश

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नई दिल्ली, 09 अक्टूबर । दिल्ली की तीस हजारी अदालत के एडिशनल सेशंस जज बलविंदर सिंह ने 2016 में उस्मानपुर में तीन हत्याओं के आरोपित जावेद को बरी करने का आदेश दिया। इस घटना में तीन महिलाओं मेहरुन्निशा, उसकी मां सायरा और शबनम की गला काटकर हत्या की गई थी, जिसकी एफआईआर उस्मानपुर थाने में दर्ज की गई थी।

पुलिस के अनुसार हैदर नामक व्यक्ति का मेहरुन्निशा से सम्बन्ध था। वह उसे आर्थिक मदद भी करता था। मेहरुन्निशां ने उससे एक लाख रुपये की डिमांड यह कहकर की थी कि उसे किरायेदारों से ली गई पगड़ी की रकम लौटानी है। हैदर इन रुपयों का इंतजाम करने में विफल रहा, तो मेहरुन्निशा ने उससे बातचीत बंद कर दी और अन्य लोगों के संपर्क में चली गई। इसके बाद हैदर और जावेद ने कथित तौर पर इन हत्याओं की साजिश रची।

फैसले में वर्णित कथित योजना के अनुसार हैदर कथित तौर पर मेहरुन्निशा की गैरमौजूदगी में घर में घुस गया और सायरा तथा शबनम की मीट काटने वाले चाकू से हत्या कर दी। कथित तौर पर हैदर तब तक घर में टीवी देखता रहा। इसके बाद मेहरुन्निशा के घर आते ही हैदर ने कथित तौर पर उसकी भी गला काटकर हत्या कर दी, लेकिन अदालत ने ठोस साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए आरोपित जावेद को बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले में संदेह मौजूद हैं और वह आरोपितों के खिलाफ कथित आपराधों के कृत्यों को सभी उचित संदेहों से परे साबित करने में विफल रहा है। जावेद द्वारा मोबाइल फोन को नष्ट करने के सिद्धांत को पेश करने के अतिरिक्त इस दावे को साबित करने के लिए कोई भी साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। इसके अलावा आरोपित को मोबाइल संपर्क नम्बर से जोड़ने के लिए कोई अन्य प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य अथवा वैज्ञानिक साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं हैं।