आसाराम की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

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जोधपुर, 20 अपै्रल । अपने ही आश्रम की नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीडऩ मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की ओर से दायर अपील पर राजस्थान उच्‍च न्‍यायालय में सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ में आज दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

आसाराम और अन्य सह आरोपितों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में 17 अप्रैल को आसाराम के वकीलों की ओर से बहस पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद पीडि़ता के वकील पीसी सोलंकी ने अपनी दलीलें शुरू कीं। इसके बाद बीस अप्रैल को खंडपीठ ने दोनों पक्षों की जिरह पूरी तरह से सुन ली और मामले में अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित रख लिया। उल्लेखनीय है कि आसाराम को साल 2013 में उनके जोधपुर के मणाई गांव स्थित आश्रम में एक नाबालिग लडक़ी के साथ यौन उत्पीडऩ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के तत्कालीन पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा ने आसाराम को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में सह आरोपित शिवा और शिल्पी को भी 20-20 साल कैद की सजा सुनाई गई थी, जबकि दो अन्य आरोपियों (शरद और प्रकाश) को बरी कर दिया गया था। इसी फैसले को आसाराम की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर अब फैसला सुरक्षित है।