दंतेवाड़ा, 22 अप्रैल । पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में आयोजित ‘मैदान कप’ में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने खेल प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन करते हुए अनेक खेल गतिविधियों में सहभागिता की। उन्होंने गांव स्थित स्वामी आत्मानंद हिंदी मीडियम हाई स्कूल में मल्टी स्पोर्ट्स ग्राउंड का उद्घाटन किया। यह मैदान सचिन तेंदुलकर और मानदेशी फाउंडेशन द्वारा निर्मित है, जिसकी फाउंडर चेतना सिन्हा भी मौजूद थीं।
कार्यक्रम में सचिन ने कहा कि इन मैदानों में नियमित खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ‘मैदान कप’ जैसे आयोजन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में डायमंड बहुत हैं, बस सही तरीके से पॉलिश करना पड़ेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में सचिन, उनकी बेटी सारा और पुत्रवधु सानिया ने विभिन्न खेल गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर बच्चों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने न केवल बच्चों को खेलों के प्रति प्रेरित किया, बल्कि स्वयं भी उनके साथ शामिल होकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार किया। कार्यक्रम के दौरान रस्साकशी, वॉलीबॉल, दौड़ और खो-खो जैसे रोचक खेल आयोजित किए गए, जिनमें बच्चों ने पूरे जोश और उमंग के साथ हिस्सा लिया। इन गतिविधियों से बच्चों में टीम भावना, आत्मविश्वास और खेल भावना का विकास हुआ। गांव के ही छात्र-छात्राएं भूमिका ठाकुर, नियासा मौर्य, निर्मला तरमा, पायल ठाकुर, सीताराम पुनर्म, अमित कुमार ने सचिन तेंदुलकर को खेल गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।
सचिन तेंदुलकर ने देश की युवा प्रतिभाओं को तराशने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए केवल व्यक्तिगत जुनून पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर आधुनिक और सुदृढ़ खेल सुविधाओं का होना अनिवार्य है। इस दौरान सचिन ने खुद को केवल क्रिकेट पिच तक सीमित न रखते हुए वॉलीबॉल और अन्य मैदानी खेलों के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए बताया कि विभिन्न खेलों में भागीदारी करने से खिलाड़ियों की रणनीतिक समझ और मानसिक परिपक्वता बढ़ती है।
पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि हमें पता चला कि बस्तर में बच्चों के लिए मैदान ही नहीं है। बस्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए हम कोच भेजेंगे, जो यहां आकर 100 स्थानीय शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे, ताकि वे शिक्षक बच्चों के हुनर को तराश सकें। सचिन ने कहा कि बस्तर में 50 स्कूल मैदानों को विकसित किया जाएगा, जहां बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी। उन्हाेंने कहा कि मैदान में प्रतियोगिता के जरिए हजारों बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा। इस पहल को मांदेशी और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है। उन्हाेंने कहा कि लगभग 5 हजार से ज्यादा बच्चों को इस अभियान से सीधा लाभ मिलेगा। कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसे खेलों के जरिए बस्तर के युवाओं को नई पहचान मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ अंचलों के बच्चों को खेलों से जोड़ना और उन्हें सकारात्मक दिशा देना है।
कार्यक्रम के समापन पर तेंदुलकर को स्मृति चिन्ह के रूप में टेराकोटा शिल्प एवं छिंदनार के ग्राम वासियों द्वारा लौह शिल्प की कलाकृतियां दी गई।