कटिहार, 11 अगस्त । जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि किसी विक्रेता या कंपनी ने निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक दर पर खाद बेची या जबरन अन्य उत्पादों की टैगिंग की, तो उनका लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। बैठक में कटिहार विधायक और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और जिलाधिकारी ने दोटूक कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम अभाव पैदा करने या तय मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उर्वरकों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों, कीटनाशी या अन्य कृषि सामग्री की अनिवार्य टैगिंग को पूरी तरह नियम विरुद्ध बताते हुए कंपनियों और विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए गए कि किसानों को किसी भी अतिरिक्त उत्पाद की खरीद के लिए बाध्य न किया जाए।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि शारदीय खरीफ मौसम के दौरान अब तक जिले में कुल 487 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई है। अनियमितताएं पाए जाने के कारण 01 प्रतिष्ठान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, 08 उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द कर दिए गए हैं, 07 को निलंबित किया गया है तथा 06 प्रतिष्ठानों से स्पष्टीकरण की मांग की गई है। किसानों को सही दर और सुगमता से खाद उपलब्ध कराने के लिए सभी उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है।
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि वर्तमान समय में जिले में किसी भी उर्वरक की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है, इसलिए किसानों को अनावश्यक रूप से भंडारण करने की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में जिले में यूरिया 11049.986 मीट्रिक टन, एनपीके 9484.83 मीट्रिक टन, डीएपी 4494.90 मीट्रिक टन, एमओपी 2654.455 मीट्रिक टन और एसएसपी 1921.40 मीट्रिक टन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। बैठक में सांसद प्रतिनिधि, सभी थोक उर्वरक विक्रेता और विभिन्न उर्वरक कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधक भी शामिल रहे, जिन्हें किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पारदर्शी और नियमसम्मत वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।