आदिवासी अधिकार, जमीन और बदलती डेमोग्राफी को लेकर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला

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रांची, 30 अगस्त । झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को आदिवासियों के हक-अधिकार, राज्य की बदलती डेमोग्राफी और आदिवासी जमीनों पर कथित कब्जे के मुद्दे पर कांग्रेस, मिशनरी संस्थाओं और राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय से आदिवासियों को छलने और उनके मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का काम किया है।

मरांडी ने कहा कि कांग्रेस ने झारखंड की अलग राज्य की मांग को लंबे समय तक नजरअंदाज किया। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन के झारखंड आंदोलनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आंदोलनों को दबाने और अपने राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने आदिवासियों की भावनाओं की कभी वास्तविक कद्र नहीं की।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आदिवासियों को बरगलाने और गुमराह करने के लिए मिशनरियों का सहयोग लिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश लंबे समय से चलती रही है।

मरांडी ने कहा कि “अगर शुतुरमुर्ग की तरह हम सिर छुपाकर रहेंगे तो शिकारी आएगा और शिकार करके चला जाएगा।” उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा के चुनाव चिह्न से जुड़े पुराने राजनीतिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर आदिवासी राजनीति को कमजोर करने का आरोप लगाया।

भाजपा नेता ने कहा कि आदिवासी समाज को यह समझने की जरूरत है कि उनके वर्तमान हालात के लिए कौन जिम्मेदार रहा है और आज कौन जिम्मेदार है। भाजपा नेता ने आदिवासियों से कांग्रेस और मिशनरियों के कथित राजनीतिक प्रभाव से सावधान रहने की अपील की।

मरांडी ने दावा किया कि संविधान से मिले आदिवासियों के अधिकार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में पूरी तरह सुरक्षित हैं। आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी और कांग्रेस को आदिवासियों के हितों के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रेस वार्ता के दौरान मरांडी ने मिशनरी संस्थाओं पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि आदिवासियों को रैली में शामिल होने के लिए रांची के आर्चबिशप की ओर से पत्र जारी किया गया था और रैली में शामिल नहीं होने पर 100 से 500 रुपये तक जुर्माना वसूलने की धमकी दी गई।

मरांडी ने इस संबंध में एक ऑडियो क्लिप भी सुनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था की ओर से आदिवासियों पर इस प्रकार का दबाव बनाया जाता है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करने के लिए दबाव या धमकी का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की बदलती जनसांख्यिकी को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफिक बदलाव हो रहा है और इस विषय पर कांग्रेस, मिशनरी संस्थाएं तथा हेमंत सोरेन सरकार चुप हैं।

मरांडी ने 1951 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1951 में आदिवासियों की आबादी 35.38 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई। उन्होंने दावा किया कि इसी अवधि में मुस्लिम आबादी 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हुई।

उन्होंने कहा कि 1951 में सनातनियों की आबादी 87.79 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 81.17 प्रतिशत रह गई। मरांडी ने इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य को लेकर भी चिंता जताई और दावा किया कि यदि इसी तरह आबादी के अनुपात में बदलाव जारी रहा तो 2051 तक आदिवासियों की आबादी 22.21 प्रतिशत तथा मुस्लिम आबादी 19 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

हालांकि, ये 2051 के आंकड़े मरांडी द्वारा प्रस्तुत अनुमान हैं, न कि वर्तमान आधिकारिक जनगणना के आंकड़े।

मरांडी ने संथाल परगना में आदिवासी आबादी के प्रतिशत में कथित कमी और मुस्लिम आबादी में वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों और दलितों को संविधान के तहत आबादी के अनुपात में विभिन्न अधिकार और प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है। ऐसे में जनसांख्यिकीय बदलाव को गंभीरता से देखे जाने की जरूरत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण राज्य सरकार इस मुद्दे पर चुप है। मरांडी ने कहा कि झारखंड और विशेष रूप से संथाल परगना की बदलती डेमोग्राफी भविष्य में आदिवासी समाज के सामने गंभीर संकट खड़ा कर सकती है।

प्रेस वार्ता में मरांडी ने आदिवासी कल्याण समिति, पाकुड़ की ओर से जारी एक पत्र भी प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि संथाल परगना के विभिन्न इलाकों में आदिवासियों की रैयती जमीनों पर कथित रूप से कब्जा कर बहुमंजिला इमारतें, कारखाने, मस्जिद और मदरसे बनाए गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि समिति की ओर से मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजे गए पत्र में पाकुड़ के कई क्षेत्रों में कथित फर्जी दान-पत्र के जरिए आदिवासी जमीनों पर कब्जे की शिकायत की गई है।

मरांडी ने दावा किया कि पत्र में कई स्थानों का उल्लेख करते हुए बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए जमीन कब्जाने की शिकायत की गई है। उन्होंने राज्य सरकार से इन आरोपों की जांच कराने और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।

बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में झारखंड में कांग्रेस और झामुमो गठबंधन की सरकार है और मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आदिवासी जमीन पर कब्जे तथा अन्य शिकायतों को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार, जमीन और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़े मामलों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार को इन पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करनी चाहिए।———–