पश्चिमी सिंहभूम, 02 अक्टूबर । जिले के गुवा क्षेत्र से होकर बहने वाली कारो नदी के पानी में काले अंश मिलने से आसपास के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। नदी के पानी में काले पदार्थ दिखाई देने की शिकायत के बाद शुक्रवार को झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू और ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ, बोलानी के संयुक्त दल ने नदी का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के अनुसार, कारो नदी लंबे समय से उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का प्रमुख जलस्रोत रही है। पानी की स्थिति बदलने के बाद ग्रामीणों ने नदी के पानी का इस्तेमाल बंद कर दिया है।
निरीक्षण के दौरान झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया नदी में उतरे और पानी की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने नदी के पानी का नमूना बोतल में लेकर सुरक्षित रखा, ताकि इसकी जांच कराई जा सके। नदी का जलस्तर कम होने के कारण पानी के अलावा नदी के पत्थरों और किनारे के आसपास भी काले अंश के निशान दिखाई दिए।
ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ, बोलानी के महामंत्री शिवाशीष नंद ने बताया कि नदी में काले अंश मिलने की जानकारी के बाद ओडिशा प्रशासन को भी इसकी सूचना दी गई थी। संयुक्त दल ने नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
ग्रामीणों ने बताया कि कारो नदी का पानी रोजमर्रा के कई कार्यों में इस्तेमाल होता था। पानी का रंग और स्थिति बदलने के बाद उन्होंने इसका उपयोग रोक दिया है। पानी की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें कुछ दिनों तक स्नान करने में भी परेशानी हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक, नलकूप से मिलने वाला पानी सीमित मात्रा में उपलब्ध है। उपलब्ध पानी को मुख्य रूप से पीने के लिए सुरक्षित रखना पड़ता है। ऐसे में नदी के पानी का इस्तेमाल बंद होने से घरेलू जरूरतों के लिए ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।
नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक सेल की ओर से भी अपने इंटेक को बंद किए जाने की बात सामने आई है। इससे नदी के पानी में मिले काले अंश को लेकर चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, काले अंश का वास्तविक स्रोत क्या है और इससे पानी की गुणवत्ता पर कितना असर पड़ा है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मामले की जानकारी स्थानीय सरपंच और जिला प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी दी गई है। वहीं, ओडिशा वन विभाग की टीम ने पचेरी क्षेत्र में कारो नदी का निरीक्षण किया है। टीम ने अपनी रिपोर्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भेजने और मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
राजेंद्र सिंधिया और शिवाशीष नंद ने कहा कि जल जीवन का आधार है और कारो नदी जैसे प्राकृतिक जलस्रोत को प्रदूषण से बचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने नदी में काले अंश के स्रोत की निष्पक्ष जांच कराने, प्रदूषण के कारणों का पता लगाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि नदी पर निर्भर ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए पानी के नमूने की जांच जल्द कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कारो नदी का पानी किस कारण प्रभावित हुआ है और आगे ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।————