कानपुर, 21 अक्टूबर । जनगणना से मिलने वाले आंकड़े देश की विकास योजनाओं, नीतियों और संसाधनों के बेहतर नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति और परिवार का विवरण सही दर्ज करने के साथ शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जाए। यह राष्ट्रीय दायित्व है, जिसे सभी कार्मिक गंभीरता और जिम्मेदारी से निभाएं। यह बातें बुधवार को ज़िलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने मर्चेंट चैंबर सभागार में जनगणना-2027 के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।
जोन-4 के प्रगणकों और सुपरवाइजरों के प्रशिक्षण का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने आंकड़ों की शुद्धता, निर्धारित समय-सीमा के पालन और डिजिटल माध्यमों के समुचित इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जनपद में जनगणना कार्य के लिए लगभग 10,500 कार्मिक लगाए जाएंगे।
उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी व्यक्ति या परिवार गणना से छूटने न पाए। मलिन बस्तियों, झुग्गी-झोपड़ियों और गैर-अधिसूचित बस्तियों में रहने वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया जाए। कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखने के साथ प्रत्येक विवरण सावधानीपूर्वक दर्ज किया जाए। उन्होंने जनगणना और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े कार्यों में समन्वय बनाए रखने तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने को कहा।
जनगणना-2027 के दूसरे चरण में 16 से 30 नवंबर तक ऑनलाइन स्वगणना होगी। इसके बाद एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी। पांच से नौ जनवरी तक पुनरीक्षण कार्य होगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी।
जनगणना के दौरान नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, आयु, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति, दिव्यांगता, भाषा, शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, जन्मस्थान, प्रवासन और बच्चों की संख्या समेत कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र और पासपोर्ट से संबंधित विवरण भी शामिल हैं। हालांकि, गणना के दौरान कोई दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा।