अभाविप प्रांत अभ्यास वर्ग के तीसरे दिन संगठनात्मक गतिविधियों और संत रविदास के विचारों पर हुआ मंथन

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सुपौल, 20 जून । जिला मुख्यालय स्थित राधेश्याम टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज परिसर में चल रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) उत्तर बिहार प्रांत के प्रांत अभ्यास वर्ग के तीसरे दिन शनिवार को संगठनात्मक गतिविधियों, नेतृत्व विकास और संत रविदास के विचारों पर केंद्रित विभिन्न बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए।

इसमें उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से आए 300 से अधिक छात्र-छात्रा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

पहले सत्र में क्षेत्रीय छात्रा कार्य प्रमुख डॉ. ममता कुमारी ने “आयाम, कार्य एवं गतिविधि” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि अभाविप केवल छात्र हितों तक सीमित संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का व्यापक आंदोलन है।

उन्होंने बताया कि परिषद विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, सेवा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही है।

उन्होंने छात्राओं की बढ़ती भागीदारी को संगठन की ताकत बताते हुए कार्यकर्ताओं से समाज के प्रति संवेदनशील रहकर शिक्षा और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

डॉ. ममता ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक दायित्वों को भी समझना होगा। परिषद ऐसे जागरूक, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ युवाओं के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है।

दूसरे बौद्धिक सत्र में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. आशुतोष मांडवी ने “संत रविदास जी” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समाज में समानता, समरसता और मानवता का संदेश दिया। उनका जीवन सामाजिक भेदभाव और ऊंच-नीच के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक रहा है। उन्होंने अपने विचारों और वाणी के माध्यम से यह संदेश दिया कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्म और चरित्र से होती है, न कि जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि से। डॉ. मांडवी ने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से सामाजिक न्याय, सद्भाव और समरसता को मजबूत करने की दिशा में कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों के आदर्श युवाओं को सकारात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराते हैं।

अभ्यास वर्ग में राष्ट्र जीवन, शिक्षा, संगठन विस्तार, व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व विकास और सामाजिक दायित्व जैसे विषयों पर लगातार सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं वर्ग की व्यवस्थाओं को लेकर सुपौल जिले के वर्तमान और पूर्व कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ जुटे हुए हैं। आवास, भोजन, चिकित्सा, मंच और अनुशासन सहित सभी व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका देखने को मिल रही है।