जयपुर, 19 सितंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने 97 लाख रुपए के व्यापारिक लेन-देन हिसाब से जुडे मामले में माणक चौक पुलिस थाने में साल 2024 में दर्ज एफआईआर व उससे जुडी आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया है। अदालत ने माना की मामला व्यापारिक लेन-देन व सिविल विवाद का है, इसलिए आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का कोई आधार नहीं है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश दीप्ति जैन की आपराधिक याचिका मंजूर करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि प्रार्थिया के रुपए का भुगतान नहीं करने की स्थिति में शिकायतकर्ता के पास रुपयों की वसूली के लिए सिविल केस या अन्य कानूनी प्रक्रिया का रास्ता था, लेकिन उसने विवाद को आपराधिक रंग देकर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मामला मूलत: व्यापारिक हिसाब-किताब से जुड़ा है। लेन-देन की शुरुआत से ही उसकी नीयत छल या धोखा देने की नहीं थी। शिकायतकर्ता ने नाजायज राशि वसूलने की नीयत से गलत हिसाब पेश किया। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की जाए। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता नीरज जैन के परिवाद पर कोर्ट के आदेश से 15 जुलाई 2024 को याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधडी सहित अन्य अपराध में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले में आरोप था कि साल 2022 से 2024 के दौरान दीप्ति जैन को आभूषणों की आपूर्ति की गई, जिसके गलत हिसाब में करीब 97 लाख रुपए बकाया बताए। याचिकाकर्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता की नीयत में धोखा था और उसने गलत हिसाब पेश किया।