बंदियों की कस्टोडियल डेथ रिलीफ और मुलाकात नीति को दें अंतिम रूप, राज्य स्तरीय कमेटी भी गठित

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जयपुर, 27 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में कैदियों के कल्याण और जेलों में मोबाइल मिलने सहित अन्य घटनाओं को लेकर राज्य सरकार को विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं। वहीं अदालत ने मामले की नियमित मॉनिटरिंग के लिए संबंधित जिला न्यायाधीशों की अध्यक्षता में डीजी जेल, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व डीओआईटी निदेशक को शामिल करते हुए कमेटी गठित करने को कहा है। सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान व अन्य याचिकाओं का निस्तारण करते हुए दिए।

अदालत ने राज्य सरकार को कहा है कि राजस्थान कस्टोडियल डेथ रिलीफ स्कीम, 2025 को तीन माह में अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जाए। वहीं कैदियों की निकट संबंधियों से समय-समय पर होने वाली मुलाकातों की अनुमति देने की नीति को भी दो माह में अंतिम रूप देने को कहा है। अदालत ने कहा कि सभी महिला जेलों में सेनेटरी वेडिंग मशीनों की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिए है कि कैदियों की संख्या के मुकाबले चालानी गार्डों की संख्या का आंकलन करे और इनकी समयबद्ध भर्ती शुरू करे। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि कैदियों को मजदूरी का भुगतान सुप्रीम कोर्ट के फूल कुमारी के मामले में दिए निर्देशों के अनुरूप हो। अदालत ने कारागार विभाग को निर्देश दिए हैं कि कोर्ट की ओर से दिए निर्देशों की पालना के लिए एसओपी तैयारी की जाए। जिसमें जेलों में मोबाइल फोन की आकस्मिक तलाशी और बरामदगी का रिकॉर्ड रखा जाए। अदालत ने डीओआईटी व राजकॉम इंफो सर्विसेज लि. को निर्देश दिए है कि जेलों के रखरखाव के सबंध में लंबित मामलों पर उचित कार्रवाई करे। इसके साथ ही बीकानेर में 275 व जयपुर में 60 सीसीटीवी सहित सभी प्रस्तावित कैमरों को तीन माह में पूरी तरह स्थापित किया जाए। अदालत ने पूर्व में पेश रिपोर्ट में बताए खराब कैमरों की मरम्मत, पर्याप्त स्टोरेज व बैकअप सुनिश्चित करने को कहा है। अदालत ने कहा कि अजमेर जेल में जगन गुर्जर की हत्या की जांच की जा रही है और सरकार संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में इस मामले को अनिश्चित काल के लिए लंबित रखने का अर्थ नहीं है, लेकिन सुरक्षा व व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसकी निरंतर निगरानी जरूरी है। अदालत ने आदेश की कॉपी सभी डीजे को भेजते हुए गठित होने वाली कमेटी को निर्देशों की पालना की प्रगति देखने के लिए हर तीन माह में बैठक करने को कहा है।

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र प्रतीक कासलीवाल ने पूर्व में पेश जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अजमेर महिला बंदी सुधार गृह में एक भी सीसीटीवी नहीं है। इसी तरह बीकानेर में बजट के अभाव में प्रस्तावित 275 में से सिर्फ 16 ही सीसीटीवी लगे हैं। जयपुर सहित अन्य जिलों में भी इनकी कमी है। अदालत की ओर से समय-समय पर सरकार को निर्देश भी दिए गए हैं। ऐसे में आदेशों की पालना के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जरूरत है।

अदालत ने अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में विचाराधीन कैदी जगन गुर्जर की हत्या पर भी स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया था। मामले में राज्य सरकार की तथ्यात्मक रिपोर्ट के अनुसार घटना के समय दूसरे विचाराधीन कैदी विष्णु ने तौलिए से गला घोंटकर जगन की हत्या कर दी थी। जांच में आया की घटना के कई दिनों पहले से वहां लगा कैमरा ऑफलाइन था।