रांची, 18 सितंबर । झारखंड उच्च न्यायालय ने बर्खास्तगी के बाद पुनर्बहाल किए गए झारखंड आर्म्ड पुलिस (जैप-8), पलामू के सिपाही जितेंद्र कुमार को 28 नवंबर 2015 से 13 अक्टूबर 2023 तक की अवधि की सेवा में निरंतरता का लाभ देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने संबंधित अवधि का बकाया वेतन सहित सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है।
अदालत ने इस अवधि को ‘नो वर्क, नो पे’ के आधार पर बिना वेतन रखने और असाधारण अवकाश के रूप में मानने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड का सत्यापन कर सभी परिणामी लाभ देने तथा बकाया राशि का भुगतान आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 12 सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया है।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता नेहा भारद्वाज ने पक्ष रखा।
दरअसल, जितेंद्र कुमार जैप-8, पलामू में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ 30 दिसंबर 2014 को विभागीय आरोप पत्र गठित किया गया था। उन पर फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने और पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने के आरोप लगाए गए थे।
विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद 28 नवंबर 2015 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ दायर उनकी अपील भी 18 मार्च 2016 को खारिज कर दी गई थी। इसके बाद जितेंद्र कुमार ने बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देते हुए झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया था।
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